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लोक में जागरुकता से तंत्र में होगा सुधार: रामलाल राही

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सीतापुर। वर्तमान में विधायिका कमजोर हुई है, अफसरशाही हावी हुई है, जिसने हमारे देश के तंत्र को खराब करने का काम शुरू किया है। अधिकारी विधायिका व न्यायपालिका को भी किनारे करने में गुरेज नहीं करते। यह लोक की संप्रभुता के लिए चिंता का विषय है। लोक में जागरूकता से तंत्र में सुधार की संभावना बढ़ेगी। यह बात हिन्दी सभा के बैठकी कार्यक्रम में ‘जैसा लोक वैसा तंत्र’ विषय पर बोलते हुए पूर्व केंद्रीय गृहराज्य मंत्री रामलाल राही ने हिंदी सभा के नरोत्तम सभागार में कही।
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जनवादी नेता डॉ. ब्रजबिहारी ने कहा कि अंग्रेज चले गए पर गांव की आजादी पर कलेक्टर का कब्जा है। बापू का ग्राम्य स्वराज का सपना आज भी अधूरा है। अंग्रेजों की तंत्र प्रणाली कायम है, जिससे आजादी के बाद भी लोक को शक्ति नहीं मिल पाई है। वर्तमान तंत्र ने पूंजीवादी लोकतंत्र को बढ़ावा दिया है। जनवादी लोकतंत्र की लड़ाई अभी बाकी है। उन्होंने यह भी कहा कि तंत्र के विरुद्ध लोक का संघर्ष पुराना है, लोकतंत्र में अच्छे लोगों की भागीदारी आवश्यक है। हिन्दी सभा अध्यक्ष आशीष मिश्र ने कहा कि लोकतंत्र की साधारण परिभाषा जनता का शासन, जनता के जरिए चुना जाता है, लिहाजा जो भी गड़बड़ियां तंत्र में आएगी, उसका कारण हम भी माने जाएंगे। उन्होंने कहा कि जब कभी भी तंत्र पर सवाल उठते हैं तो आम जनता का चुप रहना भी प्रश्न खड़ा करता है। प्रख्यात चिकित्सक डॉ. राजकिशोर टंडन ने कहा कि लोकतंत्र का वट वृक्ष भ्रष्ट वृक्ष में तब्दील हो गया है। यदि आज तंत्र में निरंकुशता बढ़ी है तो इसका बहुत बड़ा कारण लोक में ईमानदारी की कमी होना है। जब व्यक्ति अपने आप में सुधार करेगा, तभी सही मायनों में सच्चा लोकतंत्र स्थापित होगा। पत्रकार पंकज सिंह गौर ने कहा कि लोकतंत्र में जनता की आवाज उठाने वाले नेताओं का अकाल होता जा रहा है। अब चुनाव के समय ही आंदोलन होते हैं, लोक व तंत्र दोनों क्षेत्रों में गिरावट जारी है। वेद प्रकाश मिश्र ने कहा कि कहने को तो हम लोकतंत्र के मालिक है, पर हमारी भूमिका पांच वर्ष में एक बार वोट देने तक ही सीमित है। राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त शिक्षक मस्त हफीज रहमानी ने कहा कि देश में नफरत का माहौल न बनें, जाति व धर्म के नाम पर सियासतदां लोक में बंटवारा न कर सकें। ऐसे में मीडिया को एक सजग प्रहरी की भूमिका अदा करनी होगी। आरपी सिंह चौहान ने कहा कि वर्तमान तंत्र लोक को प्रभावित करने का काम कर रहा है। सही मायनों में अब जनता की आवाज सुनी ही नहीं जाती है। बार एसोसिएशन के पूर्व उपाध्यक्ष विजय अवस्थी ने कहा कि तंत्र का संवेदनशील होना जरूरी है। विनोदिनी रस्तोगी ने कहा कि भारत में लोकतंत्र को मजबूत करने में महिलाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कार्यक्रम का विषय प्रवर्तन अरुणेश मिश्रा व संचालन हिन्दी सभा के महामंत्री रजनीश मिश्रा ने किया। इस अवसर पर आरके बाजपेयी, राजकुमार तिवारी, भगवती गुप्ता, रमाशंकर मिश्रा आदि उपस्थित रहे।
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