जिले में डेेगू से निपटने के इंतजाम नहीं
सीतापुर। बारिश से जगह-जगह पर जलभराव से मच्छरों की संख्या में लगातार बढ़ती जा रही है। इससे डेंगू फैलने की आशंका बनी हुई है पर जिले का स्वास्थ्य महकमा इसके प्रति पूरी तरह लापरवाह बना हुआ है। इससे निपटने के लिए जिले में कोई पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। डेंगू के इलाज के लिए अस्पताल प्रशासन मरीजों को लखनऊ रेफर कर देता है। खास यह कि जिला अस्पताल में डेंगू की जांच तो हो जाती है मगर इलाज यहां नहीं हो पाता। जिला अस्पताल में ब्लॅड से प्लेट्लेट्स निकालने की कोई व्यवस्था नहीं है। अगर जांच में किसी को डेंगू की पुष्टि होती है और उसे प्लेटलेट्स चढ़ाने की जरूरत है। ऐसी स्थिति में अस्पताल प्रशासन हाथ खड़े कर देता है। तीमारदारों के पास दो ही विकल्प होते हैं। पहला यह है कि वह लखनऊ जाकर प्लेटलेट्स खरीदकर सीतापुर लाए दूसरा यह है कि वह मरीज को ही लखनऊ ले जाए और वहां पर प्लेटलेट्स खरीद कर चढ़वाए।
पालिका में मच्छरजनित बीमारियों के रोकथाम के समुचित इंतजाम नहीं है। रोजाना साफ-सफाई के बाद इकट्ठा कूड़ा-कचरा हफ्तों नहीं उठाया जाता। यह कूड़ा-कचरा सडक़ों के किनारे लगा रहता है। इससे मच्छरों की तादाद बढ़ रही है। इन पर अंकुश के लिए कहनवे को तो पालिका में चार फॉगिंग मशीनें हैं पर वर्तमान में सिर्फ एक ही मशीन चालू है। शेष फॉगिंग मशीनें खराब पड़ी हैं।
जिले में जनवरी से अब तक डेंगू के छह मरीज सामने आ चुके हैं जबकि एक महिला की जान भी जा चुकी है। खैराबाद के मैनासी सरैंया निवासी कपिल देव शुक्ला(27), बहेरा सुल्तानपुर निवासी श्रीराम का पुत्र विपिन (14), मछरेहटा के बनियामऊ निवासी ऊषा सिंह (65), बिसवां के वहिदापुर सर्वाहनपुर निवासी रमेशचंद्र गुप्ता की पत्नी विद्या गुप्ता (45), हरगांव के न्यामूपुर निवासी रामआधार का पुत्र मनोज कुमार(12) व संदना क्षेत्र के ग्राम कुर्सी निवासी खूबचंद की पुत्री अंकिता(13) शामिल हैं। बनियामऊ की ऊषा सिंह ने बीते 20 मार्च को केजीएमयू में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था।
बचाव के लिए करें ये उपाय
डेंगू मच्छरजनित बीमारी है। जागरूकता से ही इस बीमारी से बचा जा सकता है। बरसात का पानी कहीं पर ठहरने न दे। कूलर, टायर, गमलों में पानी इकट्ठा न होने दें। डेंगू का मच्छर साफ व जमा पानी में ही पनपता है। जलभराव हो, तो उसे साफ करें। पानी में कीटनाशक डालें। डीजल या मिट्टी का तेल भी डाल सकते हैं। जिम्मेदार अधिकारी अपने क्षेत्र में फॉगिंग कराएं। इससे मच्छर नहीं पनपेगा तो यह बीमारी नहीं होगी। लगातार बुखार रहने पर तत्काल नजदीकी अस्पताल में दिखाएं और समय से इलाज कराएं।
वर्ष 2016 में जनवरी से दिसंबर तक डेंगू के मरीजों का हाल
बीमार 187
मौत 03
गठित टीमें कर रहीं निरोधात्मक कार्रवाई
डेंगू के रोकथाम के लिए जिले में 20 टीमें बनाई गई हैं। ये टीमें शहर से लेकर गांवों तक लोगों को डेंगू के प्रति जागरूक कर रही हैं। मच्छरों पर अंकुश के लिए के खिलाफ निरोधात्मक कार्रवाई भी की जा रही है।
-डॉ. ध्रुवराज सिंह, सीएमओ