जिले के गांजरी क्षेत्र में करीब 12 गांव बाढ़ की चपेट में हैं। वहीं घाघरा और विकराल रूप लेती जा रही है। शनिवार रात रेउसा इलाके के कोनी गांव के तीन घर कटकर नदी में समा गए हैं।
यही नहीं रामपुर मथुरा क्षेत्र के दो गांव भी घाघरा की बाढ़ के निशाने पर आ गए हैं, जहां पर नदी तेजी से कटान भी कर रही है। उधर, विभिन्न बैराजों से रविवार को भी करीब दो लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।
घाघरा नदी के उफनाने से गांजरी क्षेत्र के ग्राम फौजदार पुरवा, निर्मल पुरवा, गोडिय़न पुरवा, कोनी, सिसैया बाजार, लोध पुरवा, परमेश्वर पुरवा, रामलाल पुरवा आदि बारह गांव बाढ़ की चपेट में हैं। गांव के सारे रास्ते जलमग्न हैं, वहीं कई घरों में पानी घुस गया है।
ग्रामीण पानी घटने की उम्मीद लगाए बैठे हैं, लेकिन घाघरा के जलस्तर में कोई कमी होती नजर नहीं आ रही है। शनिवार रात कोनी निवासी मिल्कीराम, रामदीन व पेशकार के घर कटकर नदी में समा गए हैं। इन घरों में रहने वाले परिवार पहले ही सुरक्षित ठिकानों की तरफ पलायन कर चुके हैं।
पानी न घटने की वजह से अन्य ग्रामीणों ने घरों को छोड़कर सुरक्षित ठिकानों की तरफ पलायन शुरू कर दिया है। रास्तों में पानी भरा होने के कारण लोगों को घरेलू सामान निकालने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बाढ़ के पानी के गांव में भरने से कच्चे घर वाले परिवार काफी परेशान हैं।
उनका कहना है कि यदि इसी तरह से पानी भरा रहा तो, दीवारें कमजोर होकर खुद ही ढह जाएंगी। बहरहाल अधिकांश ग्रामीणों ने निकट की सड़क पर डेरा डाला रखा है। रामपुर मथुरा क्षेत्र के सोती पुरवा व छोटे पुरवा गांव घाघरा नदी के मुहाने पर आ गए हैं।
सोती पुरवा से नदी का पानी सट गया है। इस गांव में करीब 42 घर मौजूद हैं। जिनमें चैनू, साहनी व गुलाब के तीन घर कटान के मुहाने पर हैं। इन घरों में रहने वाले परिवारों ने घरों को छोड़ दिया है।
सरी तरफ छोटे पुरवा से नदी का पानी महज बीस फीट दूरी पर बह रहा है। नदी का विकराल रूप होते देख, इस गांव के ग्रामीणों ने भी घरों को खाली करना शुरू कर दिया है। तटीय क्षेत्र की खेती को नदी बड़ी तेजी से काट रही है।
इससे खेतों में खड़ी फसल भी घाघरा नदी की बाढ़ व कटान की भेंट चढ़ती जा रही है। इन गांवों की बर्बादी देख नदी से करीब दो सौ मीटर दूरी पर बसे कंता पुरवा समेत एक दर्जन गांवों में बाढ़ को लेकर हड़कंप मचा है। ग्रामीण भी सकते में हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि नदी का पानी इसी रफ्तार से बढ़ता रहा तो, दो दिनों के भीतर इस क्षेत्र के कई गांव बाढ़ की चपेट में आ जाएंगे। रविवार को घाघरा, शारदा व बनबसा बैराज से 192208 क्यूसेक पानी शारदा व घाघरा नदियों में छोड़ गया है। यह पानी सीतापुर से गुजरते समय नदी के जलस्तर में इजाफा जरूर करेगा।