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स्पेशल एजुकेटरों की सेवाएं हुई समाप्त

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स्पेशल एजुकेटरों की सेवाएं समाप्त
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शासकीय व अशासकीय कॉलेजों में यह थे नियुक्ति
दिव्यांगों को पढ़ाने का जिम्मा था इनके कंधों पर

सीतापुर। माध्यमिक कॉलेजों में दिव्यांगों को शिक्षा का ककहरा सिखाने के लिए रखे गए पांच स्पेशल एजुकेटरों की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। ये शिक्षक संविदा के आधार पर एक सेवा प्रदाता फर्म के माध्यम से रखे गए थे। अब ई टेंडरिंग के जरिए नए सिरे से शिक्षकों की नियुक्ति होगी। इन्हें करीब 19 हजार रुपये मानदेय मिलता था।
राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत राजकीय व एडेड माध्यमिक कॉलेजों में स्पेशल एजुकेटर नियुक्ति किए गए थे। यह शिक्षक दिव्यांगों को पढ़ाते थे। इनकी नियुक्ति सेवा प्रदाता फर्म ओमेक्स सेक्युरिटी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से हुई थी। यह 2015 से लगातार कार्य कर रहे थे। इसके आधार पर इनको मानदेय मिलता था। जनपद में चंद्रभान द्विवेदी, अमरेश शुक्ल, सत्येंद्र मिश्र, नीता मौर्य व राजेश कुमार की नियुक्ति हुई थी। एक शिक्षक को छह कॉलेज एलाटमेंट किए गए थे। जनपद में 106 कॉलेजों में पढने वाले 147 दिव्यांगों इन शिक्षकों के सहारे थे। फर्म द्वारा शैक्षिक सत्र 2017-18 के नवीनीकरण के लिए शासन को आवेदन किया गया था। लेकिन शासन ने नवीनीकरण नहीं किया है। शासन का कहना है अब नए सिरे से ई टेंडरिंग के माध्यम से संस्था का चयन किया जाएगा। जिस पर डीआईओएस को स्पेशल एजुकेटर से कोई काम न लेने के निर्देश दिए गए हैं।
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शिक्षकों ने सीएम से लगाई गुहार
स्पेशल एजुकेटर चंद्रभान द्विवेदी का कहना है पूरी निष्ठा व लगन के साथ दिव्यांग का नामांकन कराकर उनको प्रशिक्षित करने का बखूबी काम करते थे। एकदम से सेवाएं रोक देने से बहुत आघात पहुंचा है। अब रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। जुलाई में नया सत्र शुरू हो गया है। सेवाएं समाप्त होने से दिव्यांग के नामांकन पर असर पड़ेगा। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की है जब तक ई टेंडरिंग व्यवस्था लागू नहीं हो जाती है तब तक कार्य करने दिया जाए या विभागीय संविदा पर रख लिया जाए। ताकि दिव्यांगों की शिक्षा व्यवस्था बाधित न हो।
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समाप्त हो गई हैं सेवाएं
स्पेशल एजुकेटरो की सेवाएं समाप्त कर दी गई है। इसको लेकर सभी प्रधानाचार्यों को निर्देश दिए गए है। वह इनसे कोई कार्य न लें।
-देवकी सिंह, डीआईओएस
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