क्षेत्रवासियों ने आक्रोश, अस्पताल कर्मियों पर लगाया लापरवाही का आरोप
रेउसा (सीतापुर)। सेहत महकमे के कारिंदों की बेपरवाह कारगुजारी ने इंसानियत को उस वक्त शर्मसार कर दिया जब सीएचसी के पीछे एक नवजात का शव कुत्तों का निवाला बन गया। इस शव को कुत्तों द्वारा नोंचकर खाए जाने का नजारा देख हर कोई अवाक रह गया।
नागरिकों में इसे लेकर बेतहाशा गम व गुस्सा है। वहीं, स्वास्थ्य विभाग में हड़कम्प मच गया। अफसर जांच व कार्रवाई की बात कहकर अपना दामन बचाने की जुगत में लग गए हैं। शनिवार की दोपहर कस्बा स्थित सीएचसी के पीछे मानवता का झकझोर देने वाला नजारा दिखाई दिया।
दरअसल, सीएचसी में प्रसव के बाद की गंदगी नष्ट करने का कोई ठोस इंतजाम नही है। स्वास्थ्य कर्मी यह गंदगी अव्वल तो सीएचसी के पीछे खुले में फेंक देते हैं। ज्यादा से ज्यादा जिम्मेदारी का निर्वहन किया तो गड्ढा खोदकर उसमें गंदगी डाल दी। लेकिन गड्ढे में गंदगी डालने के बाद उस पर फिर मिट्टी डालने की जहमत नहीं उठाई जाती।
नतीजतन, आवारा कुत्तों का झुंड इस जगह जमा रहता है। यह कुत्ते अपने निवाले की खोज में रहते हैं। सूत्र बताते हैं कि नवजात शिशुओं के शव भी खुले में ही फेंक दिए जाते हैं। यह शव कुत्तों का निवाला बन जाते हैं। शनिवार की दोपहर इसी तरह का हैरान कर देने वाला नजारा दिखाई दिया। एक नवजात का शव का ऊपरी हिस्सा गायब था। जबकि नीचे का हिस्सा कुत्ते नोंचकर खा रहे थे।
स्थानीय नागरिकों ने यह दृश्य देखा तो उन्होंने कुत्तों को खदेड़ा। फिर सीएचसी में शिकायत की गई। स्थानीय नागरिक रवी वर्मा, विनोद, संता जायसवाल तथा हरेन्द्र अवस्थी कहते हैं कि पहले भी कई बार इस लापरवाही की शिकायत सीएचसी के जिम्मेदार अफसरों से की गई। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। गंदगी व नवजात शिशुओं के शव खुले में फेंक दिए जाते हैं।
महामारी फैलने का बना रहता खतरा
सीएचसी की गंदगी व नवजात शिशुओं के शव खुले में फेंकने से कस्बे में महामारी फैलने का खतरा भी बना रहता है। कस्बा वासियों के मुताबिक कोई भी गंभीर बीमारी फैलने से नागरिकों के जीवन पर संकट आ सकता है। इस पर रोक लगाई जानी चाहिए।
गंदगी को गड्ढा खोदकर उसमें डालने के बाद मिट्टी से दबाने के स्पष्ट निर्देश हैं। प्रसव के दौरान किसी वजह से नवजात की मृत्यु होने पर उसका शव भी मिट्टी में दबा देना चाहिए। यदि इसमें लापरवाही बरती जा रही है तो इसकी जांच कराई जाएगी। दोषी कर्मियों पर सख्त कार्रवाई होगी।
-अनंत मिश्र, रेउसा सीएचसी प्रभारी