सीतापुर। जिले के तीन होनहारों ने भारतीय इंजीनियरिंग सेवा में लोहा मनवाया है। इस परीक्षा में अली वारिश खान ने 16वीं, विपुल बाजपेई ने 35वीं व अर्पित सिंह ने 77वी रैंक हासिल कर जिले का मान बढ़ाया है। यह होनहार इस समय सरकारी सेवा में कार्यरत है। इन्होंने अपनी सफलता का श्रेय माता, पिता व गुरुजनों को दिया है। इसके पीछे वे कड़ी मेहनत बता रहे हैं। इस सफलता से उनके माता-पिता व परिवारीजन फूले नहीं समा रहे हैं।
इसरो में हैं वैज्ञानिक
खैराबाद इलाके के मियासरायं निवासी शिक्षक डॉ. मेराजुद्दीन के इकलौते पुत्र अली वारिश खान ने आईईएस में 16वीं रैंक हासिल की है। अली वारिश खान इस समय इसरो में वैज्ञानिक हैं। इन्होंने शुरुआती शिक्षा खैराबाद के स्टडी प्वाइंट स्कूल से हासिल की। उसके बाद 12वीं तक सिंघानिया एजुकेशनल इंस्टीट्यूट से पढ़ाई की। केएनआईटी सुल्तानपुर से बीटेक किया। 2017 में बीटेक करने के बाद अगस्त 2018 में इसरो में जॉइनिंग की। इस सफलता के पीछे अली का कहना है कि बहुत कड़ी मेहनत की। घर परिवार का पूरा सहयोग मिला। इसी वजह से आज यह मुकाम हासिल हुआ है। इस पर शिक्षक समुदाय के आराध्य शुक्ल, अपूर्व दीक्षित, मोहम्मद हारुन, रामचंद मिश्र, मनीष पांडेय, रणविजय सिंह, बच्छन खां, मतलूम हैदर, सैय्यद आमिर रिजवी ने बधाई दी है।
भगवान के आशीर्वाद से मिला मुकाम
शहर के प्रेमनगर निवासी अर्पित सिंह ने आईईएस में 77वीं रैंक हासिल करके मान बढ़ाया है। अर्पित इस समय भारत पेट्रोलियम अहमदनगर महाराष्ट्र में इंजीनियर हैं। रिजल्ट आते ही वह खुशी से झूम उठे। अर्पित के पिता सत्येंद्र सिंह बीएसएनएल से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। माता अमिता सिंह एचकेएम में सेवारत हैं। अर्पित ने सेक्रेड हार्ट इंटर कॉलेज से इंटर तक की शिक्षा ग्रहण की। उसके बाद आईआईटी दिल्ली से इंजीनियरिंग की। अर्पित के बड़े भाई भी इंजीनियर हैं। अर्पित का मानना है कि घर परिवार से ही आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। जब घर का माहौल अच्छा होता है तो काफी मदद मिलती है। मेरी सफलता के पीछे पूरा परिवार का विशेष सहयोग रहा है। भगवान के आशीर्वाद से आज यह मुकाम मिला है।
दूसरों के लिए बन गए प्रेरणास्रोत
आदर्श नगर सेक्टर प्रथम के निवासी विपुल बाजपेई ने 35वीं रैंक हासिल कर सफलता के नए आयाम गढ़े हैं। वह दूसरों के लिए प्रेरणास्रोत बन गए हैं। विपुल इस समय इलेक्ट्रॉनिक कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया हैदराबाद में नौकरी कर रहे हैं। विपुल ने सेक्रेड हार्ट इंटर कॉलेज से इंटरमीडिएट की शिक्षा ग्रहण करने के बाद आईआईटी बीएचयू से बीटेक किया। इसके बाद एक वर्ष आईईएस की तैयारी की। चयन होने के बाद सेवानिवृत्त बैंक प्रबंधक पिता कमलाकर बाजपेई व माता कुसुमलता अपने लाल की सफलता पर फूले नहीं समा रही हैं। विपुल का कहना है कि लक्ष्य को टारगेट मानकर तैयारी की। नौकरी करने के साथ ही तैयारी भी करता रहा। इससे सफलता मिलने में बहुत आसानी रही। विपुल ने अपनी सफलता का श्रेय माता पिता व गुरुजनों को दिया है।