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पांच घंटे रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद कुएं से निकाला गया तेंदुआ

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लखनऊ चिड़ियाघर के विशेषज्ञों की टीम ने डेढ़ घंटे का सफर पूरा करने में लगा दिए 16 घंटे
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सरैंया (सीतापुर)। लखनऊ से आई विशेषज्ञों की टीम ने पांच घंटे रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद तेंदुए को कुएं से बाहर निकाल लिया। जाल में फंसाकर ऊपर खींचने के बाद तेंदुए को ट्रैंकूलाइज कर देर शाम बाहर निकाला जा सका। सदरपुर इलाके में रविवार शाम कुएं में गिरे तेंदुए को निकालने में जिले से लेकर लखनऊ तक की टीम ने लापरवाही की सारी हदें पार कर दीं।

लखनऊ चिड़ियाघर से बुलाई गई विशेषज्ञों की टीम इस कदर बेपरवाह रही कि डेढ़ घंटे का सफर 16 घंटों में पूरा कर पाई। विशेषज्ञों की टीम सोमवार की दोपहर करीब ढाई बजे गांव पहुंची। डीएफओ सहित वन विभाग के अफसर, दो थानों की पुलिस, फायर ब्रिगेड के जवान रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान डटे रहे। बड़ी संख्या में ग्रामीणों के जमा होने से गांव में अफरातफरी का माहौल रहा।
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थानाक्षेत्र सदरपुर के खाफाकला गांव में रविवार की शाम करीब सात बजे एक तेंदुआ शिकार की तलाश में पहुंचा था। अंधेरे में चहलकदमी का आभास होने पर घर के बाहर बैठे टहलूराम ने टॉर्च लगाई। अचानक टॉर्च की रोशनी पड़ते ही तेंदुआ हड़बड़ा गया और सामने स्थित जमीन के बराबर कुएं में जा गिरा।

खबर पाकर रेंजर महमूदाबाद अनूप पांडेय व फॉरेस्ट गार्ड सुशील कुमार ने गांव पहुंचकर हालात परखे और आला अफसरों को अवगत कराया। वन विभाग की ओर से रात में ही लखनऊ चिड़ियाघर के विशेषज्ञों को पूरा वाक्या बताकर तेंदुए को कुएं से बाहर निकालने में मदद मांगीं गई।

विशेषज्ञों की टीम ने लापरवाही की सारी हदें पार करते हुए आने में हीलाहवाली की। आलम यह रहा कि राजधानी से डेढ़ घंटे का सफर पूरा करने में विशेषज्ञों की टीम ने 16 घंटे लगा दिए। सोमवार की दोपहर 2:30 बजे चिड़ियाघर के विशेषज्ञों की टीम गांव पहुंची। टीम में ट्रैंकुलाइज स्पेशलिस्ट डॉ. विजेंद्र, कमाल खां, इसरार, आरिफ व नासिर शामिल थे।

इसके बाद तीन बजे डीएफओ अनिरुद्ध पांडेय पहुंचे। विशेषज्ञों ने रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान पहले पंपिंग सेट के जरिए कुएं का पानी निकाला। फिर कुएं में जाल डाला। तेंदुआ जब जाल में फंस गया तो रस्सी के सहारे बाहर खींचने का प्रयास किया।

चार बार जाल सहित तेंदुए को बाहर खींचने का प्रयास नाकाम रहा। इस दौरान अंधेरा होने पर रेस्क्यू ऑपरेशन में दिक्कतें आने लगीं। कुछ देर तक अंधेरे में कवायद करने के बाद जनरेटर का इंतजाम किया गया। हाईमास्ट लाइट की रोशनी में जाल में फंसाकर तेंदुए को एक बार फिर बाहर निकालने की कवायद शुरू की गई।

रस्सी के सहारे आधी दूरी तक ऊपर खींचने के बाद तेंदुए को टंकुलाइज कर दिया गया। इसके बाद उसे बाहर निकाला गया। करीब पांच घंटे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चला। इस दौरान वन विभाग का अमला, सदरपुर व थानगांव पुलिस, फायर बिग्रेड के जवान मुस्तैद रहे।

...जब तेंदुए की दहाड़ से भाग खड़े हुए एसओ सदरपुर
विशेषज्ञों की टीम तेंदुए को जाल में फंसाकर कुएं से बाहर निकालने का प्रयास कर रही थी। रस्सी के सहारे जाल में फंसा तेंदुआ ऊपर खींचा जा रहा था। जाल कुएं की ऊपरी सतह के करीब आ चुका था। सुरक्षा के लिहाजा से एसओ सदरपुर सूर्यबली पांडेय मातहतों के साथ कुएं के इर्दगिर्द मुस्तैद थे। इसी बीच तेंदुआ दहाड़ उठा। बुलंद दहाड़ सुनकर एसओ व पुलिसकर्मी भाग खड़े हुए।

रात भर दहाड़ता रहा तेंदुआ, जागते रहे ग्रामीण
कुएं में गिरा तेंदुआ रात भर दहाड़ता रहा। तेंदुए की दहाड़ से खौफजदा ग्रामीणों को नींद नही आई। दहशत का आलम यह कि ग्रामीण रात भर जागते रहे। सोमवार को भी तमाम कवायदों के बाद तेंदुए को कुएं से बाहर नही निकाला जा सका। गांव में बड़ी संख्या में ग्रामीणों के जमा होने से अफरातफरी का माहौल है।

भीड़ के कारण बर्बाद हो गई कई बीघा फसल
तेंदुए को कुंए से निकाले जाने का मंजर देखने आसपास कई गांवों के ग्रामीण खाफाकला में डटे हुए हैं। हजारों की संख्या में भीड़ जमा होने से गांव में हर तरफ अफरातफरी मची रही। किसान टहलूराम ने एक बीघा खेत में टमाटर की फसल, इतने ही दायरे में शिव नंदन ने आलू, धनीराम ने गोभी तथा अयोध्या ने टमाटर की फसल उगाई थी। भीड़ की चहलकदमी से इनकी सारी फसल बर्बाद हो गई।

तेंदुए ने नहीं खाया कुएं में डाला गया मुर्गा
पिछले चौबीस घंटे से कुएं में पड़े तेंदुए की भूख का ख्याल कर एक मुर्गा कुएं के अंदर डाला गया। मगर तेंदुए ने मुर्गे को नहीं खाया। इतना ही नही तेंदुए ने मुर्गे की ओर ध्यान ही नहीं दिया। कुछ देर बाद मुर्गा उड़कर ऊपर मुंडेर पर आ बैठा।

रेस्क्यू ऑपरेशन देखने के लिए स्कूल नहीं गई छात्राएं
कुएं से तेंदुए को बाहर निकालने का रेस्क्यू ऑपरेशन देखने के लिए सोमवार को कई छात्राएं कॉलेज नहीं गईं। गांव की शालिनी मौर्य व रूबी किसान इंटर कॉलेज की छात्राएं हैं। दोनों ने बताया कि ऐसा हमारे इलाके में पहली बार हुआ है कि तेंदुआ कुएं में गिरा हो। उसे कुएं के बाहर किस तरह निकाला जाएगा, यह देखने की उत्सुकतावश कॉलेज नहीं गए हैं।

कुएं में गिरने से घायल हो गया तेंदुआ
कुएं में गिरने से तेंदुआ घायल हो गया था। पिछले चौबीस घंटों से पानी में रहने का विपरीत प्रभाव भी उसकी सेहत पर पड़ रहा था। कुएं में मिट्टी व लकड़ी डाली गई थी। यह गलत है। इससे तेंदुए को सांस लेने में दिक्कत भी हो रही थी।
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-डॉ. विजेन्द्र, ट्रैंकुलाइज स्पेशलिस्ट

इलाज के बाद लखनऊ चिड़ियाघर जाएगा तेंदुआ
तेंदुए को जाल में फंसाकर ऊपर खींचा गया। फिर ट्रैंकुलाइज कर सुरक्षित कुएं से बाहर निकाल लिया गया है। पहले महमूदाबाद रेंजर ऑफिस ले जाकर तेंदुए का इलाज किया जाएगा। फिर उसे लखनऊ चिड़ियाघर भेजा जाएगा। इसके बाद जिस जंगल में छोड़ने का परमिशन मिलेगा, तेंदुआ उसी जंगल में छोड़ दिया जाएगा।
-डॉ. अनिरुद्ध पांडेय, डीएफओ
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