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बाढ़ पीड़ित हो तो खाओ सड़े आलू, वर्ना झेलो मुकदमा

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बाढ़ पीड़ितों को बांट रहे सड़े आलू
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विरोध करने पर लेखपाल ने दो ग्रामीणों पर दर्ज कराया मुकदमा
थानगांव में मदद के नाम पर पीड़ितों से हो रहा मजाक

थानगांव (सीतापुर)। जिला प्रशासन अब बाढ़ पीड़ितों से मजाक पर उतर आया है। पीड़ितों को बांटने के लिए सड़े आलू भेज दिए गए हैं। वहीं सड़े आलू मिलने का विरोध करने पर लेखपाल ने दो ग्रामीणों पर मुकदमा लिखा दिया। बाढ़ पीड़ित इस कदर डरे हैं कि वे बाढ़ राहत चौकी जाने से भी घबरा रहे हैं। हालांकि विवाद के बाद वहां मौजूद अमले ने बाढ़ राहत चौकी में मौजूद सड़े आलू को फेंकना शुरू कर दिया है।
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रेउसा, थानगांव व रामपुर मथुरा क्षेत्र में आई बाढ़ से लोग सड़कों पर आ गए। पर पीड़ितों मदद के नाम पर उनसे मजाक किया जा रहा है। थानगांव क्षेत्र में बाढ़ राहत चौकी बनाई गई है। यहां पर पीड़ितों को राहत सामग्री में 10 किलो आलू भी दिया जाना है। हालांकि बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए इस चौकी पर सड़े आलू भेज दिए गए हैं। यहां पर राहत सामग्री लेने आए ग्रामीणों में शामिल सीपतपुर निवासी जगत सिंह व अमित सिंह ने इसका पुरजोर विरोध किया। फिर क्या था वहां मौजूद लेखपाल सत्येंद्र कुमार तृतीय भड़क गए। लेखपाल ने तत्काल थानगांव थाने में तहरीर दी, कि जगत सिंह व अमित सरकारी काम में बाधा पहुंचा रहे हैं और गालियां देकर मारपीट कर रहे हैं। इस पर थानगांव पुलिस ने लेखपाल की तहरीर पर जगत सिंह व अमित सिंह पर सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने व मारपीट की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की है। जगत सिंह व अमित सिंह का कहना है कि यदि वे सड़े आलू के बंटने का विरोध न करते, तो लेखपाल को कोई ऐतराज नहीं था। उधर लेखपाल का कहना है कि दोनों ने बेवजह उनसे मारपीट की। थानाध्यक्ष जयंती प्रसाद गंगवार ने बताया कि लेखपाल की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज की गई है, मामले की जांच की जा रही है। यहां बता दें कि विवाद बढ़ने के बाद वहां मौजूद अमले ने सड़े आलू को फेंकना शुरू कर दिया है।
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