सीतापुर। जिले में कैंसर के प्रतिवर्ष करीब 11 हजार मरीज सामने आते है। प्राथमिक जांच में इनमें कैंसर के लक्षण दिखते है। जिले में कैंसर इलाज की कोई व्यवस्था नहीं है। अस्पतालों में न तो डॉक्टर है और न ही जांच व इलाज की सुविधा है। ऐसे में मरीजों को लखनऊ मेडिकल कॉलेज रेफर किया जाता है। जिले स्तर पर केवल मरीजों को परामर्श ही दिया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक जिले में 22 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र है। इनमें करीब नौ हजार मरीज रोजाना ओपीडी में इलाज कराने आते है। वहीं, जिला व महिला अस्पताल में रोजाना साढ़े तीन हजार मरीज पहुंचते हैं। इनमें प्रतिवर्ष करीब 11 हजार ऐसे मरीज चिन्हित किए जाते हैं, जिनमें कैंसर के लक्षण प्रतीत होते हैं। यह कैंसर गुर्दा, मुंह, स्तन, सिर व पेट आदि में होता है। इन मरीजों को मेडिकल कॉलेज लखनऊ रेफर किया जाता है। जिले में इसके लिए कोई जांच व इलाज की सुविधा नहीं है।
जगी है उम्मीद
शासन ने सीतापुर में कैंसर अस्पताल बनाये जाने का निर्णय लिया है। तहसील प्रशासन की तरफ से जमीन की तलाश की जा रही है। हालांकि अभी यह जमीन नहीं मिल सकी है। शुरुआती चरण में इसे 50 बेड का बनाया जाएगा। उसके बाद जरुरत के मुताबिक बेड़ों की संख्या बढ़ाई जाएगी। इससे लखनऊ जाने वाले मरीजों की भागदौड़ बचेगी। वहीं, जब यह सीतापुर में बन जाएगा तो लखीमपुर, शाहजहांपुर, हरदोई आदि जनपदों के भी मरीज लाभ उठा सकेंगे।
जमीन की हो रही है तलाश
जिले में कैंसर इलाज की कोई सुविधा नहीं है। शासन ने सीतापुर में अस्पताल बनाने की बात कही है। तहसील प्रशासन से जमीन मिल जाने के बाद शासन को जमीन का प्रस्ताव भेजा जाएगा।
- डॉ. सुरेश कुमार, सीएमओ