सीतापुर। जिले के तमाम प्रधानों ने अपने कार्यकाल में सरकारी धन का गलत उपयोग किया। इसमें संबंधित सचिव भी बराबर के जिम्मेदार रहे। इनका खुलासा ग्राम पंचायतों की लेखा परीक्षा में हो रहा है। एक ब्लाक की दो ग्राम पंचायतों के आडिट में सवा 11 लाख रुपये गबन करने का मामला सामने आया है। इस पर संबंधित प्रधान व सचिव से वसूली के आदेश दिए गए हैं। वसूली की कार्रवाई शुरू की गई है।
ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 25 दिसम्बर को समाप्त हो गया। जिले की 1601 ग्राम पंचायतों का गठन वर्ष 2015 के दिसंबर माह में हुआ था। पांच साल तक गांवों में विकास के लिए शासन ने विभिन्न कार्यों के लिए बड़ी रकम मुहैया कराई। जिससे विकास कार्य तो नहीं हुए, लेकिन इसे खर्च करने वालों का विकास जरूर हुआ। सड़क, नाली, तालाब, चकरोड, कैटलशेड, सामुदायिक शौचालय, पंचायत भवन, हैंडपम्प, स्कूलों की बाउंड्रीवॉल, व्यक्तिगत शौचालय आदि कार्य कराने के लिए जितनी धनराशि दी गई।
उसके अनुसार गांवों में काम नहीं हो सके। इसी कारण गांवों की तस्वीर खर्च धनराशि के अनुपात में नहीं बदली। गांव के रास्ते चलने लायक नहीं हैं। नालियों से पानी की निकासी सही प्रकार नही हो रही है। गांवों के विकास के लिए भेजी गई भारी भरकम धनराशि के दुरुपयोग करने व हड़पने के मामलों का खुलासा हो रहा है। जिला पंचायत राज अधिकारी मनोज कुमार ने बताया कि ग्राम पंचायतों का आडिट करने का प्रावधान है। इसी के तहत लेखा परीक्षा अधिकारी द्वारा अभिलेखों की जांच की जाती है।
उन्होंने बताया कि विकास खंड रामपुरमथुरा की ग्राम पंचायत अंगरौरा का आडिट किया गया। यहां वर्ष 2016-17 से 2018-19 के दौरान नौ लाख तीन हजार 31 रुपये का गबन पाया गया है। इसके लिए उत्तरदायी प्रधान अशोक तिवारी एवं सचिव रक्षित कुमार से धनराशि की वसूली समान रूप करने की संस्तुति की गई है। इसी प्रकार ग्राम पंचायत गौरा का भी आडिट किया गया।
यहां वर्ष 2015-16से 2018-19 के दौरान दो लाख 26 हजार 698 रुपये का गबन पाया गया। इसके लिए भी संबंधित प्रधान विकास सिंह एवं सचिव संतोष कुमार से समान रूप से वसूली करने की संस्तुति की गई है। जिला पंचायत राज अधिकारी ने बताया कि एडीओ पंचायत रामपुर मथुरा को कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।