फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जीवनदायिनी सरायन नदी की सफाई का अभियान शुरू

विज्ञापन
विज्ञापन
सदर विधायक व डीएम ने संयुक्त रूप से किया शुभारंभ
विज्ञापन

सीतापुर। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जयंती की पूर्व संध्या पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मिशन नमामि गंगे अभियान को आगे बढ़ाते हुए सोमवार को शहर की जीवनदायिनी सरायन नदी के सफाई का अभियान छेड़ दिया है। सदर विधायक राकेश राठौर की पहल पर सरायन नदी की सफाई का श्रीगणेश हो गया है।

इस अभियान में पोकलैंड मशीन से नदी से सिल्ट की सफाई की जाएगी, बाद से उसे छायादार वृक्षों को लगाकर इसे हरा-भरा बनाया जाएगा। शहर के कैंची पुल के समीप नगर विधायक राकेश राठौर व जिलाधिकारी शीतल वर्मा ने पहले पूजन अर्चन किया। बाद में फीता काटकर सरायन नदी की सफाई का अभियान शुरू किया।
विज्ञापन


विधायक राठौर ने कहा कि सरायन नदी को साफ सुथरा बनाने का संकल्प लिया था, जिसे पूरा करना है। उन्होंने कहा कि नदियां जीवनदायिनी होती हैं। इनके संरक्षण से ही पर्यावरण को शुद्ध बनाए रखा जा सकता है। राकेश राठौर ने कहा कि नमामि गंगे की तर्ज पर कैंची पुल के नीचे से सफाई अभियान की शुरुआत की गई है।

सरायन नदी को पोकलैंड मशीन के जरिए साफ किया जाएगा। यह अभियान बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती 14 अप्रैल तक अनवरत चलेगा। जिलाधिकारी शीतल वर्मा ने कहा कि नदियां हमारी जीवनदायिनी हैं, इनके बिना एक स्वच्छ एवं स्वस्थ वातावरण की कल्पना नहीं की जा सकती है।

उन्होंने नदी के बंद पड़े स्रोतों को खुलवाने के लिये संबंधित अधिकारियों को निर्देश भी दिए। इस अवसर पर जिलाध्यक्ष अजय गुप्ता, रामेंद्र शुक्ला, राहुल जायसवाल, संजय मिश्रा, अचिन मेहरोत्रा, राजीव मेहरोत्रा, अवनींद्र विक्रम सिंह, सुभाष अग्निहोत्री, सतीश जायसवाल, सहज गुप्ता, गोपाल टण्डन, प्रेम अग्रवाल, राकेश गुप्ता आदि उपस्थित थे।

सरायन का गोला से गोमती तक का है सफर
शहर के बीचोंबीच से निकली सरायन नदी का उद्गम स्थल लखीमपुर का गोला तहसील है। यहां से नदी निकलकर सीधे लखनऊ के गोमती नदी में मिलती है। अगर नदी के अस्तित्व की बात की जाए करीब 20 साल पहले नदी अपने पूरे उफान पर बहती थी।
विज्ञापन


उसके बाद जैसे-जैसे शहर की आबादी बढ़ी उसके किनारों पर अतिक्रमण होने लगा। शहर का गंदा पानी नदी में आने लगा। इससे एक तो नदी में गंदगी हो गई वहीं इसका आकार सिमट गया। अब जब नदी की सफाई शुरू हुई तो लोगों में उम्मीद जगी कि वह एक बार फिर से अपने पुराने अस्तित्व पर लौट आएगी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें