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20 गांवों पर मंडराया बाढ़ का खतरा

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रेउसा (सीतापुर)। पहाड़ों पर हो रही बारिश का असर जिले के गांजरी इलाके में देखने को मिल रहा है। यहां पर उफनाई घाघरा नदी मुसीबत का सबब बनी हुई है। घाघरा का जलस्तर बढ़ने से बीते एक सप्ताह से तटीय क्षेत्र के करीब सात गांवों के संपर्क मार्ग बाढ़ के पानी की चपेट में आ गए हैं। करीब 10 ऐसे गांव हैं, जहां बाढ़ का पानी चंद कदमों की दूरी पर ही हिलोरें मार रहा है। जबकि 20 गांव बाढ़ के मुहाने पर हैं।
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इन गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। बाढ़ का पानी धीरे-धीरे गांवों की तरफ बढ़ रहा है, जिससे तटीय इलाकों के लोगों में हड़कंप मचा है। वहीं आने वाले दिनों में भी मुसीबत कम होती नजर नहीं आ रही है। रविवार को बैराजों से सवा दो लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इससे नदी के जलस्तर में और इजाफा होने की संभावना जताई जा रही है।

रेउसा क्षेत्र में म्योड़ी छोलहा, कोनी, दुर्गापुरवा, लोध पुरवा, कटैला पुरवा, मरेली, जैतहिया, दर्जिन रेती, नगीना पुरवा, पासिन पुरवा आदि दस गांवों के चंद कदमों की दूरी पर घाघरा नदी की बाढ़ का पानी हिलोरे मार रहा है। सबसे अधिक खतरा कोनी दुर्गा पुरवा व लोध पुरवा गांव पर मंडरा रहा है। इन गांवों से महज 10 से 30 मीटर की दूरी पर बाढ़ का पानी भर रहा है।
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क्षेत्र के परमेश्वर पुरवा, फौजदार पुरवा, कोनी आदि गांवों के सात संपर्क मार्ग बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। कहीं पर तीन फीट तो कहीं पर तीन फीट बाढ़ का पानी संपर्क मार्गों पर बह रहा है। क्षेत्र की करीब तीन हजार बीघा खेती बाढ़ के पानी में समा गई है। खेतों में जाने वाले चकमार्ग पानी में गुम हो गए हैं। हालत यह है कि किसानों को खेत की फसल का हाल जानने के लिए नावों का सहारा लेना पड़ रहा है।

किसान नावों से खेत पहुंच रहे हैं और अपनी बर्बाद होती फसल को निहार कर वापस गांव चले आ रहे हैं। नदी का पानी जिस हिसाब से बढ़ रहा है, उसे देखकर तटीय क्षेत्र के बाशिंदे भयभीत हैं। लोगों का कहना है कि नदी का पानी जाने कब आबादी में घुस जाए और गांव बाढ़ की चपेट में आ जाए। इस बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता है।

ग्रामीणों का कहना है कि करीब एक सप्ताह से बाढ़ का पानी धीरे-धीरे गांवों की तरफ बढ़ रहा है। आबादी से बरसात का पानी निकाल कर नदी में गिरने वाले सभी नाले इन दिनों बाढ़ के पानी से लबालब भरे नजर आ रहे हैं। इन नालों से गांव का पानी तो नदी में जा नहीं रहा। उल्टे नदी की बाढ़ का पानी आबादी की तरफ बढ़ रहा है।

जहां क्षेत्र में इस तरह की हालत है, वहीं रविवार को शारदा व घाघरा बैराजों से 234501 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इससे आने वाले दिनों में स्थिति और बिगड़ने की संभावना है। जानकारों का कहना है कि जब यह पानी सीतापुर से गुजरेगा, तब और भी मुसीबत का सबब बनेगा।

तहसीलदार बिसवां गिरीश झा ने कहा कि घाघरा नदी का जलस्तर बढ़ रहा है, इससे तटीय क्षेत्र के कुछ इलाकों में पानी नदी के बाहर आ गया है। अभी बाढ़ जैसे हालात नहीं है, स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

घाघरा नदी का रौद्र रूप देख तटीय क्षेत्र के बाशिंदे बाढ़ आने को लेकर सशंकित है। इन बाशिंदों ने अब सड़कों का रुख कर लिया है। पीड़ित परिवार संपर्क मार्गों व बहराइच मार्ग पर आशियानों को दुरुस्त कर रहे हैं। इसको लेकर वे फूस व बांस को एकत्र कर छप्पर छा रहे हैं और टटिया लगाकर झोपड़ी तैयार कर रहे हैं। कुल मिलाकर पूरे इलाके में सैकड़ों परिवार इसी तरह के नए आशियाने सड़कों के किनारे तैयार करते नजर आ रहे हैं।
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बैराजों से छोड़ा गया पानी
घाघरा 99447 क्यूसेक
शारदा 135054 क्यूसेक
बनबसा 79274 क्यूसेक

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