सिद्धार्थनगर। गरीब परिवार की बेटियों की शादी के लिए अब सरकार किसी को अनुदान नहीं देगी, अलबत्ता खुद उनका विवाह कराएगी। एक ही मंडप के नीचे सात फेेरे होंगे तो निकाह के लिए कबूलनामा भी लिया जाएगा। सर्व धर्म समभाव और सबका साथ-सबका विकास के तहत प्रदेश सरकार ने नई मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना शुरू की है। एससी-एसटी, ओबीसी और अल्पसंख्यक सहित हर वर्ग की कन्याओं को इसी योजना से लाभान्वित किया जाएगा।
गरीब परिवार की बेटियों के हाथ पीले करने के लिए पूर्ववर्ती सरकारों मेें अलग-अलग विभागों से योजनाएं संचालित होती रही है। एससी-एसटी, ओबीसी, सामान्य और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के माध्यम से संचालित इन योजनाओं में आवेदन करने वालों को सिर्फ अनुदान देकर विभाग इतिश्री कर लेता था।
नई सरकार ने अलग-अलग विभाग की शादी अनुदान योजनाओं पर रोक लगा दी है। अब समाज कल्याण विभाग के माध्यम से मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना की शुरुआत हुई है। हर वर्ग की पात्र कन्याओं को इस योजना से लाभान्वित किया जाएगा। इसके तहत निर्धारित लक्ष्य के सापेक्ष विभाग पात्र जोड़ों का चयन एक साथ उनका विवाह कराएगा। प्रत्येक जोड़े के लिए कुल 35 हजार रुपये तक के खर्च का अनुमान रखा गया है।
एक ही मंडप के नीचे अलग-अलग धर्म और जाति के जोड़ों का विवाह उनकी सामाजिक और धार्मिक परंपरा के अनुसार कराए जाएंगे। सामूहिक विवाह के इस उत्सव में स्वयं सेवी संस्थाओं व समाज के संभ्रात नागरिकों की मदद ली जाएगी, जिनके माध्यम से बेटियों की शादी के लिए अनुदान से अतिरिक्त होने वाले खर्च की पूर्ति की जाएगी। सीडीओ अनिल कुमार मिश्र ने बताया कि मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह के रूप में नई योजना के दिशा-निर्देश प्राप्त हो गए हैं। समाज कल्याण विभाग के माध्यम से इसका संचालन किया जाएगा। जल्द ही चयन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।