-हक, इंसाफ, सच्चाई और मानवता की रक्षा के लिए कर्बला में शहीद हुए थे हजरत इमाम हुसैन : हाशिम रिजवी
संवाद न्यूज एजेंसी
डुमरियागंज। मोहर्रम की दसवीं तारीख को हक और बातिल सत्य-असत्य के बीच कर्बला के मैदान में हुई जंग में शहीद हुए हजरत इमाम हुसैन की यादगार में मनाया जाता है। इसमें पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन ने दीने इस्लाम और हक, सच्चाई, मानवता की रक्षा के लिए यजीद के अन्याय का विरोध करते हुए अपने 72 साथियों और परिजनों के साथ शहीद हो गए।
हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में मोहर्रम पर हर वर्ष दुनियां भर के करोड़ों हक और इंसाफ पसंद लोग मर्सिया मजलिस आयोजित कर और जुलूस निकालकर नौहा मातम करके उन्हें अकीदत पेश करते हैं। 1400 साल पहले कर्बला के तपते रेगिस्तान में लड़ी गई जंग में हजरत मोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन ने अपने परिजनों साथियों ने यजीद के लाखों के लश्कर से मुकाबला किया और अपनी और अपने परिजनों की जान की कुर्बानी देकर इस्लाम, हक, सच्चाई, इंसाफ मानवता की रक्षा की। इमाम हुसैन के साथ उनके छह माह के मासूम बेटे अली असगर, कड़ीयल जवान बेटे अली अकबर, बहादुर वफादार भाई हजरत अब्बास, बुजुर्ग दोस्त हबीब इब्ने मजाहिर, कमसिन भतीजे हजरत कासिम, भांजे औन, मोहम्मद आदि को यजीदी लश्कर ने शहीद कर दिया।
जंग के दौरान यजीदी लश्कर ने हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों, परिजनों पर तरह-तरह के जुल्म किए। तीन दिन तक उन्हें भूखा-प्यासा रखा, लेकिन इमाम हुसैन और उनके परिजनों ने हक इंसाफ का दामन अंत तक थामे रखा। दरअसल इसे जंग कहना अन्याय होगा, यह एक तरफा कत्लेआम था। मोहर्रम में हुई इस जंग को इतिहास में बड़ा अहम मुकाम है। लाखों की फौज और भरपूर ताकत का स्वामी यजीद स्वयं को धर्म गुरु घोषित कर हजरत इमाम हुसैन से हठधर्मिता को मान्यता देने की जिद कर रहा था।
हजरत इमाम हुसैन इसे नाइंसाफी भरा कदम बताकर बैय्यत लेने से इन्कार कर रहे थे। हक और इंसाफ के लिए जान देना उन्होंने बचपन से ही अपने नाना हजरत मोहम्मद साहब और वालिद हजरत अली से सीखा था। इमाम हुसैन की शहादत की याद में यूं तो सभी लोग गमजदा रहते हैं, लेकिन शिया बाहुल्य इलाकों का माहौल और भी दिल को दहलाने वाला होता है। घर-घर से मातम और नौहा, मरसिया की सदा के बीच दहाड़े मारकर रोने की आने वाली सदाएं राह चलने वालों की भी आंखें नम कर देती है।
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मोहर्रम की आठवीं पर आज निकलेगा अलम ताबूत का जुलूस
मोहर्रम की आठवीं तारीख पर सोमवार की सुबह 9 बजे डुमरियागंज क्षेत्र के हल्लौर कस्बा स्थित दरगाह हजरत अब्बास से अलम का जुलूस निकाला जाएगा। जो पूरे कस्बे में नौहा मातम के बीच गश्त करके रात्रि 9 बजे वापस दरगाह हजरत अब्बास में समाप्त होगा। रात्रि 10 बजे कस्बा स्थित इमामबारगाह हुसैनिया बाबुल से अलम ताबूत का जुलूस निकाला जाएगा। जो नौहां मातम के साथ भोर में वापस उसी बारगाह में आकर समाप्त होगा।