फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हटा बाढ़ का पानी, मडराने लगा संक्रामक बीमारी का खतरा

विज्ञापन
विज्ञापन
बाढ़ का पानी हटा, संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ा
विज्ञापन

बाढ़ प्रभावित गांवों में अभी तक बीमारी से बचाव के इंतजाम नहीं
गर्मी और पानी के सड़न से पनपती रही है संक्रामक बीमारी
नदी के किनारे बसे 57 गांव थे बाढ़ से प्रभावित
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। बाढ़ में फसल गवां चुके लोगों के सामने अब संक्रामक बीमारियों का खतरा है। बाढ़ का पानी घटने के बाद जलजनित बीमारियों के फैलने की संभावना बढ़ गई है। पानी की सड़न और गंदगी से लोगों बुरा हाल है। बावजूद इसके प्रशासन की ओर से अभी इन गांवों में न तो फागिंग कराई गई और न ही स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांवों को दौरा किया। अगर जल्द प्रशासन की ओर से स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया नहीं कराया गया तो कोरोना से भयावह स्थिति होने से इन्कार नहीं किया जा सकता है।
विज्ञापन

नेपाल की तराई क्षेत्र में गिने जाने वाले इस जनपद के लोगों को हर वर्ष बाढ़ के संकट से गुजरना पड़ता है। इस वर्ष लगातार हुई बारिश और नेपाल से पानी छोड़े जाने के बाद नदी के किनारे बसे गांवों में बाढ़ आ गई। प्रशासन की रिपोर्ट के अनुसार 75 गांव बाढ़ की चपेट में आए हैं। पिछले कई दिन से बारिश रुकने के बाद नदियों का जलस्तर नीचे आया तो बाढ़ का पानी हट गया। मगर बाढ़ का पानी हटने के बाद भी प्रभावित गांवों के लोगों को जीवन का खतरा है। कारण बाढ़ का पानी हटते ही सड़क, गंदगी और गर्मी अब संक्रामक बीमारी देना शुरू दिया है। लोग वायरल बुखार की चपेट में आ रहे हैं। मगर बाढ़ का संकट खत्म होने के बाद प्रशासन की ओर से गांव में न तो स्वास्थ्य टीम भेजकर स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया और न ही अभी तक फागिंग कराई गई। बाढ़ प्रभावित गांव बढ़नी ब्लॉक के खैरी शीतल प्रसाद के कोदई साहनी का कहना है कि लगभग हर वर्ष बाढ़ से हम ग्रामवासी परेशान रहते हैं। अबकी बार भी तीन बार बूढ़ी राप्ती और घोरही नदी में अधिक पानी आ जाने से उनकी फसलें उसमें डूब गई और नुकसान भी हुआ। पानी तो घटा मगर अब बीमारी का डर मंडराने लगा है। तालकुंडा के तमकुहवा टोले के रहने वाले अशोक पासवान का कहना है कि अगर थोड़ा भी घोरही नदी के जलस्तर में बढ़ोत्तरी होता है तो टोलेवासी कहीं निकल नहीं सकते। मटियार उर्फ भुतहवा के पूर्व प्रधान मो. सफात का आरोप है कि प्रशासन की लापरवाही के कारण छह ग्राम सभाओं के कई टोलों में रहने वाली हजारों की आबादी बाढ़ से प्रभावित हो जाती है। अभी तक न ही स्वास्थ्य विभाग की ओर से दवा का छिड़काव किया गया और न ही कोई सरकारी सहायता दिया गया। तौलिहवा के हरिराम का कहना है ग्रामसभा के सातों टोले लगभग हर वर्ष बाढ़ से प्रभावित होते हैं। बाढ़ के समय ही अधिकारी व नेता दिखाई देते हैं। न बाढ़ के पहले न बाढ़ के बाद कोई दिखाई देता है। नदियों की कटान से कई टोलों के लोग परेशान हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से बचाव के कोई उपाय नहीं किए गए। एडीएम सीताराम गुप्ता ने बताया कि सीएमओ की निगरानी में स्वास्थ्य विभाग की टीम को लगा दिया गया है। गांव में फागिंग और स्वास्थ्य शिविर लगाकर चेकअप करेंगे और दवा भी वितरण करेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें