सिद्धार्थनगर। नई बाइक या कार खरीदने के बाद उसे आकर्षक बनाने का शौक लोगों पर भारी पड़ रहा है। जिले के वाहन एसेसरीज बाजार में कीमतों को लेकर कोई एकरूपता नहीं है। एक ही कंपनी और मॉडल के उत्पाद अलग-अलग दुकानों पर अलग-अलग दामों में बेचे जा रहे हैं। कई दुकानों पर बिना एमआरपी और बिना पक्के बिल के सामान की बिक्री की जा रही है। मॉडिफिकेशन के नाम पर भी ग्राहकों से मनमाने पैसे वसूले जा रहे हैं। ऐसे में जानकारी के अभाव में उपभोक्ता अतिरिक्त रकम चुकाने को मजबूर हैं।
जिले में नौगढ़, तेतरी बाजार, बढ़नी, शोहरतगढ़, डुमरियागंज और बिस्कोहर कस्बों में दोपहिया और चारपहिया वाहनों की एसेसरीज की करीब 70 से अधिक दुकानें संचालित हैं। यहां सीट कवर, फ्लोर मैट, एलईडी लाइट, मोबाइल होल्डर, हॉर्न, फॉग लैंप, म्यूजिक सिस्टम, कैमरा, डैश कैम, स्टिकर, व्हील कैप, अलॉय व्हील कवर सहित कई तरह के उत्पाद बिक रहे हैं।
बाजार में सबसे अधिक शिकायत कीमतों को लेकर सामने आ रही है। कार चालक अखिलेश त्रिपाठी कहते हैं कि जिस सीट कवर का एक दुकानदार 1,800 रुपये दाम बताता है, वही दूसरा दुकानदार 2,500 रुपये तक मांग लेता है। इसी तरह एलईडी लाइट, फ्लोर मैट और मोबाइल होल्डर जैसी सामान्य वस्तुओं में भी 20 से 50 प्रतिशत तक कीमत का अंतर देखने को मिल रहा है।
नई कार खरीदने वाले बैंक कर्मी राघवेंद्र बताते हैं कि दुकानों पर सामान बिना पैकिंग, बिना एमआरपी और बिना कंपनी के नाम के बेचा जा रहा है। जब बिल मांगते हैं तो उन्हें कच्ची पर्ची थमा दी जाती है या फिर बिल देने से ही मना कर दिया जाता है। ऐसे में उत्पाद खराब होने पर वारंटी और गारंटी का लाभ भी नहीं मिल पाता।
लंबे समय से वाहनों के शौकीन अखिलेश गुप्ता कहते हैं कि वाहनों के मॉडिफिकेशन के नाम पर भी ग्राहकों से मनमानी वसूली की जा रही है। अतिरिक्त एलईडी, प्रीमियम हॉर्न, ग्राफिक्स, रूफ लाइट और अन्य सजावटी उपकरण लगाने के लिए अलग-अलग दुकानदार अपनी सुविधा के अनुसार श्रम शुल्क तय कर रहे हैं। कई बार ग्राहक बिना जानकारी के महंगा सामान खरीद लेते हैं, जबकि वही उत्पाद कुछ दूरी पर स्थित दूसरी दुकान पर काफी कम कीमत में उपलब्ध रहता है।
उधर, कार श्रृंगार की दुकान चलाने वाले मोहित का कहना है कि अलग-अलग कंपनियों, गुणवत्ता, आयात लागत और ब्रांड के अनुसार कीमतों में अंतर स्वाभाविक है। हालांकि उपभोक्ताओं का मानना है कि बिल और निर्धारित मूल्य का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए, जिससे खरीदारी में पारदर्शिता बनी रहे।
विशेषज्ञों का कहना है कि वाहन में ऐसे उपकरण लगवाने से बचना चाहिए जो मोटर वाहन नियमों का उल्लंघन करते हों। अत्यधिक तेज रोशनी वाली एलईडी, प्रेशर हॉर्न और अवैध मॉडिफिकेशन पर कार्रवाई भी हो सकती है।