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लाइन में लगने के बाद भी नहीं मिल रही यूरिया

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कतार में लगने के बाद भी नहीं मिल रही यूरिया
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प्रभावशाली चंद लोगों में वितरित कर उल्लू सीधा कर रहे व्यवसायी
बिचौलियों और कालाबाजारियों पर कार्रवाई नहीं कर पा रहा प्रशासन
अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर। खरीफ की फसल के लिए भोर पहर से ही खाद की दुकान पर कतार लगाने वाले किसानों को घंटों इंतजार के बाद भी मायूस होकर लौटना पड़ रहा है। आरोप है कि अधिकतर दुकानदार प्रभावशाली लोगों को बही और आधार कार्ड पर गुपचुप ढंग से खाद बांट रहे हैं और आम किसान को खाद खत्म होने की बात कहकर लौटा रहे हैं।
उर्वरक का वास्तविक मूल्य 266 रुपये हैं मगर यही खाद दिन डूबने के बाद बिचौलिए एवं तस्कर के हाथों दुकानदार, 400 से 500 रुपये में खुले आम बेचता है। तस्कर इसे नेपाल की सीमा के पास गांव तक ले जाकर नेपाली नागरिकों को 1600 से लेकर 1800 रुपये में प्रति बोरी बेचकर दोगुने से अधिक धन कमाते हैं। शासन की ओर से खाद की कालाबाजारी रोकने के लिए किसानों को उनके किसान बही तथा आधार कार्ड के आधार पर पर्ची काट कर ही निर्धारित वास्तविक मूल्य 266 रुपये में ही खाद देने का निर्देश हैं। इसके बाद भी शाम होते ही बिना किसान बही व आधार कार्ड के, 400 रुपये से लेकर 500 रुपये तक में तस्करों के हाथों सैकड़ों बोरी खाद बेच दी जाती है। उप जिलाधिकारी सदर उमेश चंद्र निगम ने बताया कि उर्वरक की कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
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कड़ी धूप में लगा रहे लाइन
मोहाना चौराहे पर किसान सड़क पर कड़ी धूप में खाद की आशा में परेशान है। पुरानी नौगढ़ में स्थित एक प्राइवेट दुकान पर दिन डूबते ही सीमेंट की गोदाम में सीमेंट के चट्टे के पीछे रखे खाद को निकालकर मोटरसाइकिल पर कुछ लड़कों द्वारा बांधकर ले जाते हुए देखा जा सकता है।
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