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शुद्ध पेयजल को तरस रहे नगर पंचायत इटवा के लोग

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शुद्ध पेयजल को तरस रहे नगर पंचायत इटवा के लोग
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इटवा (सिद्धार्थनगर)। दो वर्ष पूर्व नगर पंचायत का दर्जा प्राप्त करनेवाले इटवा कस्बा के निवासियों को शुद्ध पेयजल के लिए तरसना पड़ रहा है। ग्राम पंचायत रहने के दौरान 10 वर्ष पूर्व बनी पानी की टंकी से अभी तक पेयजल की आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी है। इसके साथ नगर के सभी मोहल्लों में शुद्ध पेयजल सुविधा नहीं होने से लोग निजी हैंडपंप का दूषित पानी पीने के लिए मजबूर हैं।
इटवा कस्बे के उत्तरी छोर पर बनी पानी की टंकी के संचालन का बार-बार प्रयास किया गया लेकिन अभी तक संचालन शुरू नहीं हो सका। गनवारिया पूरब निवासी अमित दूबे बताते है कि पानी टंकी के निर्माण के बाद तेजी से मोहल्लों एवं लोगों के घर तक पाइप लाइन बिछाने का कार्य शुरू हुआ था। पाइप बिछाने के साथ कई स्थानों पर टोटियां लगाई गयी थी, परंतु ट्रायल के दौरान पाइपों में लीकेज होने के चलते सफल नही रहा। इसके बाद जगह-जगह खुदाई करके पाइप बदले गये, परंतु विभाग को जलापूर्ति करने में सफलता नही मिल सकी। महादेव घूरहू निवासी जमीदार अग्रहरि कहते है कि विभागीय अधिकारियों की लापरवाही से शहर बनने के बाद भी कस्बा में शुद्ध पेयजल व्यवस्था दुरुस्त नहीं हो पाई है। उन्होंने कहा कि इटवा कस्बा, गनवरिया, अमौना, विशुनपुर बैराडीह सहित कई गांवों को इस टंकी से पेयजल की आपूर्ति होनी थी परंतु मानक के विपरीत पाइप के चलते पानी आपूर्ति नहीं हो पाई।
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छेदी लाल वर्मा कहते हैं कि शुरू में एक सप्ताह तक इटवा चौराहे व सीएचसी सहित कई स्थानों पर बगैर टोटियों के पानी की आपूर्ति हुई थी, जिसके चलते कई स्थानों पर जलभराव हो गया था। इसके बाद जलापूर्ति बंद हो गई और आज तक शुरू नहीं हो सकी। इटवा कस्बे के डॉ. नादिर सलाम कहते हैं कि पानी की टंकी के निर्माण के बाद भी सप्लाई नहीं होने से लोग शुद्ध पेयजल के लिए तरस रहे हैं। इसके साथ ही कस्बा के अन्य मोहल्लों में भी शुद्ध पेयजल की कोई व्यवस्था नहीं है, जिस कारण लोगों को सांसत झेलनी पड़ रही है। ईओ इटवा अतुल सिंह का कहना है कि पेयजल सुविधा मुहैया कराने के लिए कार्ययोजना बनाकर भेजी गई है, जिसकी स्वीकृति मिलते ही कार्य शुरू करा दिया जाएगा।
संक्रामक बीमारियों का बढ़ा खतरा
दूषित पेयजल का प्रयोग करने से कस्बावासियों में संक्रामक बीमारियां फैलने का खतरा है। यहां के कई मोहल्लों में छोटे बच्चे अक्सर डायरिया आदि बीमारियों से ग्रसित रहते है और बड़ों को भी पेट संबंधी बीमारी रहती है। नगरवासियों ने शुद्ध पेयजल व्यवस्था दुरूस्त करने की मांग की।
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दो बार पाइपो को निकालकर नई पाइप लाइन बिछाई गई। लेकिन, विभाग को सफलता नहीं मिल सकी। यही कारण है कि इस टंकी के निर्माण के बाद किसी भी कस्बावासी को एक बूंद पानी अभी तक नसीब नहीं हो सका जबकि लाखों रुपये खर्च हो गए।
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