शहर को निर्बाध बिजली मिलने का रास्ता साफ
सिद्धार्थनगर। शहर वासियों को निर्बाध बिजली मिलने का रास्ता अब साफ हो गया है। सब कुछ ठीक रहा तो इस साल के अंत तक सुचारु रूप से बिजली मिलने लगेगी। फरेंदा-नौगढ़ लाइन बनाने का कार्य तेजी से चल रहा है। बिजली निगम के अनुसार, नवंबर तक कार्य पूरा हो सकता है। यह लाइन बनने के बाद बांसी-नौगढ़ लाइन में फॉल्ट या शटडाउन होने पर फरेंदा-नौगढ़ लाइन से आपूर्ति की जा सकेगी। फिलहाल बांसी नौगढ़ लाइन में फॉल्ट आने पर शहर सहित आधे जिले की बिजली बाधित हो जाती है।
वर्ष 2011 में फरेंदा से नौगढ़ तक 132 केवीए लाइन बनाने का टेंडर हुआ, लेकिन विवाद के चलते कार्यदायी संस्था ने कार्य नहीं किया। काफी समय बीत गया तो फरवरी 2022 में बिजली निगम पुराने अनुबंध को निरस्त करके नई फर्म को कार्य सौंप दिया है। 40 किमी की लाइन में 132 टॉवर लगने हैं। इनमें 27 टॉवर का कार्य अभी नहीं हुआ है। फाउंडेशन कार्य 60 प्रतिशत पूर्ण हो गया है, जबकि टॉवर व तार खींचने का कार्य 40 प्रतिशत हो चुका है। ट्रांसमिशन अधिकारियों के अनुसार, नवंबर तक कार्य पूरा हो जाएगा।
बांसी-नौगढ़ लाइन 11 साल पुरानी है। अगस्त में 19 और 28 तारीख को ट्रांसमिशन लाइन में फॉल्ट आ गया। घंटों मशक्कत के बाद लाइन बनी तो आपूर्ति बहाल हुई। ट्रांसमिशन लाइन में मरम्मत कार्य के लिए 4 सितंबर को पांच घंटे बिजली काटने की सूचना थी लेकिन नौ घंटे बाद आपूर्ति बहाल हो सकी। बांसी-नौगढ़ लाइन से शहर, उसका, शोरहतगढ़, रेहरा, लोटन एवं बर्डपुर क्षेत्र में बिजली आपूर्ति दी जाती है।
बिजली बंद होते ही रुक जाते हैं काम
शहर में बिजली आपूर्ति बाधित होने के बाद कार्य में रुकावट आ जाती है। बत्ती गुल हो जाती है और पंखे बंद हो जाते है। इससे लोगों की परेशानी बढ़ जाती है। काफी देर तक बिजली नहीं आने से छतों पर रखी पानी की टंकियां खाली हो जाती हैं। इससे लोगों की दिनचर्या प्रभावित हो जाती है। वहीं आरओ वॉटर पंप नहीं चलने से घरों में पेयजल आपूर्ति नहीं हो पाती है, जबकि मोबाइल फोन बंद होने से लोग संचार नेटवर्क से दूर हो जाते हैं।
फरेंदा-नौगढ़ लाइन का कार्य नवंबर तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। तेजी से कार्य किया जा रहा है। वर्ष 2011 में ही इस लाइन बनाने का टेंडर हुआ था, लेकिन विवाद के कारण कार्य नहीं हो पाया है। अब दूसरी फर्म से कार्य कराया जा रहा है। -राजेश कुमार, एसडीओ, ट्रांसमिशन