शनिवार को ताजिये के जुलूस के दौरान शोहरतगढ़ में दो पक्षों के संघर्ष में एक शख्स की मौत के बाद से क्षेत्र में अतिरिक्त सतर्कता बरत रही सिद्धार्थनगर पुलिस ने मंगलवार को यहां आने की कोशिश करते सांसद एवं महंत आदित्यनाथ को रास्ते में रोक दिया।
सिद्धार्थनगर और महराजगंज की सीमा पर मौजूद दोनों जिलों की पुलिस के सांसद का काफिला रोकते ही वहां जुटे हिंदू युवा वाहिनी के कार्यकर्ताओं ने सड़क पर ही धरना शुरू कर दिया।
अफसरों के समझाने पर भी सांसद ने वापसी का रुख नहीं किया तो पुलिस ने उन्हें व साथ मौजूद डुमरियागंज के सांसद जगदंबिका पाल को गिरफ्तार कर लिया। करीब एक घंटे बाद उन्हें रिहा कर दिया गया।
सांसद आदित्यनाथ का काफिला दोपहर करीब 1.30 बजे महराजगंज में बेलसड़ मोड़ पर पहुंचा तो वहां पहले से मौजूद महराजगंज और सिद्धार्थनगर की पुलिस ने रोककर वापस जाने के लिए कहा। सांसद जगदंबिका पाल वहां पहले से मौजूद थे। दोनों सांसदों नेे शोहरतगढ़ जाने के फैसले पर कायम रहने का एलान किया।
इस बीच वहां मौजूद हिंदू युवा वाहिनी और भाजपा के कार्यकर्ताओं ने पुलिस के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। महराजगंज के एसपी भारत सिंह यादव ने सिद्धार्थनगर जिला प्रशासन के हवाले से सांसद के शोहरतगढ़ जाने की अनुमति न होने का तर्क रखा।
इससे उत्तेजित कार्यकर्ताओं ने सड़क पर धरना शुरू कर दिया। मौके पर पहुंचे सिद्धार्थनगर के डीएम डॉ. सुरेंद्र कुमार, एसपी अजय साहनी ने शोहरतगढ़ में पंचायत चुनाव और शांति बनाए रखने के लिए उनका दौरा रोकना जरूरी बताया।
इससे नाराज सांसद आदित्यनाथ ने हर हाल में शोहरतगढ़ जाने की बात दोहराते हुए धरना दे रहे कार्यकर्ताओं के बीच सभा शुरू कर दी। आदित्यनाथ के साथ-साथ जगदंबिका पाल ने भी सभा को संबोधित किया।
मान-मनोव्वल की कोशिशें कामयाब न होने पर अफसरों ने शाम 4.30 बजे सांसद आदित्यनाथ की गिरफ्तारी का एलान कर दिया। कार्यकर्ताओं को अलग गाड़ी में भेजते हुए पुलिस अफसर सांसद आदित्यनाथ के साथ उन्हीं की गाड़ी में सवार होकर सिद्धार्थनगर की तरफ ले गए।
सांसद जगदंबिका पाल भी उनके साथ मौजूद रहे। सकारपार होते हुए उन्हें बांसी लाया गया, जहां से इटवा-बढ़नी होते हुए बलरामपुर जिले की सीमा पर उन्हें रिहा कर दिया।
वहीं एसपी अजय साहनी ने कहा कि जिले में निषेधाज्ञा के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए दोनों सांसदों और करीब 100 कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया। बांसी में मजिस्ट्रेट की अनुमति के बाद उन्हें बलरामपुर दिशा में जाने दिया गया।