बर्डपुर क्षेत्र में काला नमक धान की फसल को देखते किसान कृष्णा पांडेय।
सिद्धार्थनगर। जिले में कालानमक धान की खेती करने वाले किसानों के नाम अब सामने आ जाएंगे। इससे मिलावटखोरों का धंधा मंदा होगा और स्वाद और सुगंध की विशेषता वाले धान की मांग और कीमत भी बढ़ने की संभावना है।
कालानमक धान के खेतों का सर्वे तेजी से किया जा रहा है ताकि खेत की कटाई से पहले रिपोर्ट प्राप्त हो जाए।
साल 2018 में कालानमक चावल ओडीओपी में शामिल हुआ तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रांडिंग हुई और तत्कालीन डीएम दीपक मीणा को पीए एक्सीलेंसी अवाॅर्ड भी मिला।
अब डीएम डॉ. राजा गणपति आर ने कालानमक चावल की साख बचाने की पहल की है। अब धान की खरीद करने वाले कारोबारी प्रशासन की सर्वे रिपोर्ट के अनुसार किसानों से सीधे संपर्क करेंगे तो किसान अपनी साख की चिंता करेंगे और असली चावल ही बेचेंगे।
प्रचार-प्रसार के बाद कालानमक धान की कीमत और मांग बढ़ गई थी, लेकिन मिलावटखोरों ने ऐसी साख गिरा दी है कि किसानों को ग्राहकों का इंतजार करना पड़ रहा है, जबकि कालानमक धान की खेती के विशेष पहचान वाले सिद्धार्थनगर में शुद्ध कालानमक धान और चावल प्राप्त करना बड़ी चुनौती बन गई है।
ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि राजेश कुमार मिश्र ने बताया कि कालानमक चावल में मिलावट के कारण बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ है। एक बार तो, उपहार में भेजा गया, चावल स्वाद व सुगंध में अंतर के कारण लखनऊ से वापस आ गया था।
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