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पंचायत चुनाव में मुसीबत बनेंगे दोहरी नागरिकता वाले

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पंचायत चुनाव में मुसीबत बनेंगे दोहरी नागरिकता वाले
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मतदाता सूची में फर्जी नाम जोड़ने की बढ़ीं शिकायतें, गांवों में माहौल गरम
सीमावर्ती क्षेत्र के गांवों में कई नेपाली नागरिकों को मतदाता बनाने का है आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। वैसे तो सीमावर्ती क्षेत्र के गांवों की मतदाता सूची में नेपाली नागरिकों के नाम शामिल होने के आरोप बहुत पहले से लगते रहे हैं, लेकिन पंचायत चुनाव के पहले यह मामले जोर-शोर से उठने लगते हैं। कारण इस चुनाव में एक-एक मत पर दावेदारों की नजर रहती और प्रधान समेत अन्य पदों पर यह मत निर्णायक साबित होते हैं। अब एक बार फिर से मतदाता सूची में नेपाली नागरिकों के नाम शामिल होने के आरोप लगने शुरू हो गए हैं।
पंचायत चुनाव की तैयारियों के बीच मतदाता सूची के पुनरीक्षण कार्य के अंतिम चरण में जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। चुनाव में बढ़त बनाने के लिए दावेदारों की ओर से किए गए दावे और आपत्तियों की 670 गांवों में जांच के दौरान कई स्थानों पर बवाल हुए और तनाव भी बढ़ गए हैं। जो जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी कम नहीं हो रहा है। दावेदार मतदाता सूची में अपने पक्ष के अधिक से अधिक नामों को जुड़वाने और विपक्ष के नामों को हटवाने के लिए पूरी ताकत लगाए हैं। उसका ब्लॉक के ग्राम चौरासी निवासी विजय शुक्ल, झीनक प्रसाद, अब्दुल कादिर, प्रदीप कुमार, रामसुमिरन और मोहम्मद उमर ने एसडीएम नौगढ़ को दिए शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि गांव की मतदाता सूची में दूसरे गांव के मतदाता सूची में शामिल 38 मतदाता ऐसे हैं जिनका यहां पर कोई मकान नहीं है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि गांव की मतदाता सूची में सात नाम ऐसे हैं जो नेपाल के नागरिक हैं। इस बाबत एसडीएम नौगढ़ विकास कश्यप ने कहा कि मामले में बीडीओ उसका बाजार को जांचकर कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है।
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चार ब्लॉकों के अधिकांश गांवों में हैं नेपाली नागरिक
जिले के सीमावर्ती ब्लॉक बढ़नी, शोहरतगढ़, बर्डपुर और लोटन क्षेत्र के अधिकांश गांवों में नेपाल के नागरिकों के मतदाता सूची में नाम शामिल होने के आरोप लगते हैं। यहां के कई लोगों का नेपाल और भारत दोनों स्थानों पर खेती और मकान है। इनमें कुछ तो सिर्फ भारत के ही मतदाता सूची में नाम रखे हैं जबकि कई ऐसे हैं जिनका दोनों स्थानों पर नाम है। वर्तमान में इससे जुड़े कई गांवों से शिकायतें दर्ज कराई गई हैं।
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विधानसभा चुनाव में नहीं उठता मामला
यहां के लोगों का नेपाली नागरिक होने का मामला बहुत पहले से चला आ रहा है, लेकिन लोकसभा और विधानसभा चुनावों में इस तरह के मामले बहुत कम ही उठते हैं। कारण यह है कि राजनीतिक लोग मतदाताओं के इस तादाद को चुनाव को प्रभावित करने वाला नहीं मानते हैं, इस कारण इस पर ध्यान नहीं देते हैं। वहीं कई गांवों में नेपाली मतदाताओं के निर्णायक होने के कारण पंचायत चुनाव में इनका महत्व बढ़ जाता है।
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