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Siddharthnagar News: स्मार्ट हुए चोर... गहने-नकदी के साथ ''''सबूत'''' की भी चोरी

Thu, 26 Feb 2026 12:54 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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सिद्धार्थनगर। अपराध पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस जहां स्मार्ट हुई है और तकनीक का इस्तेमाल कर चोरों तक पहुंच रही है, वहीं चोर अब भी उनसे एक कदम आगे चल रहे हैं। वारदात को अंजाम देने वाले यह शातिर और स्मार्ट चोर अब सुबूत के तौर पर पहचान उजागर करने वाले सीसीटीवी कैमरे का डीवीआर भी उठा ले जा रहे हैं। इससे न सिर्फ पुलिस को आसपास-पड़ोस में लगे सीसीटीवी का सहारा लेना पड़ रहा है, बल्कि चोरों के तौर-तरीकों से उन तक पहुंचने में उनका पसीना छूट जा रहा है।
कुछ वारदातों में एक नया ट्रेंड सामने आया है, जिसमें पहले तो बड़े घर को चोर टारगेट कर रहे हैं। वहीं, बड़ा हाथ मारने के साथ घर में लगे सीसीटीवी कैमरा से छेड़छाड़ करने के साथ ही डीवीआर भी समेट ले जा रहे हैं। बांसी कस्बे में भाजपा नेता की दुकान में हुई चोरी की वारदात में चोरों ने इसी पैटर्न पर काम किया है।
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चोरी की वारदात को देखते हुए पुलिस लोगों को सीसीटीवी कैमरा लगाने वाले के लिए प्रेरित कर रही है। इसमें आपरेशन त्रिनेत्र के तहत लगभग हर चौराहे और कस्बों में लोगों ने कैमरे लगवा रखे हैं। खास करके दुकानों पर तो सभी लोग लगवा रहे हैं। इसके अलावा कुछ परिवार स्वयं अपने घरों पर कैमरा लगवा लिए हैं, जिससे अगर कोई हरकत हो तो वह कैमरे के जरिये जानकारी ले सके। पुलिस की मंशा भी यही रहती है कि सीसीटीवी कैमरे के जरिये वह चोरी और अन्य आपराधिक वारदातों को अंजाम देने वाले शातिरों को ट्रेस कर लेगी। कई मामलों में पुलिस को इस प्रयोग से सफलता भी मिली है।
हाल के महीनों में सामने आए मामलों से साफ है कि शातिर गिरोह पहले कैमरों से छेड़छाड़ करते हैं, फिर वारदात को अंजाम देकर सुबूत मिटाने के लिए रिकॉर्डिंग सिस्टम भी साथ ले जाते हैं। बांसी और डुमरियागंज में हुई वारदातों में इस बदले पैटर्न के जरिये चोरों ने घटना को अंजाम दिया है। बांसी कस्बे में भाजपा नेता के घर उनके कार्यालय के पास ही है। चोरों ने बेहद सुनियोजित तरीके से वारदात को अंजाम दिया। पहले सीसी कैमरों की दिशा बदली या उन्हें क्षतिग्रस्त किया गया, फिर कीमती सामान समेटने के बाद डीवीआर मशीन भी साथ ले गए। ठीक इसी तरह का पैटर्न दो माह पूर्व डुमरियागंज में भी देखने को मिला, जहां अध्यक्ष के घर हुई चोरी में भी रिकॉर्डिंग सिस्टम गायब मिला।
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मुखबिर जैसा सहयोगी है सीसीटीवी कैमरा
पुलिस सूत्रों के अनुसार, अधिकांश चोरी के मामलों में सीसीटीवी कैमरों से पुलिस को अहम सुराग हाथ लगे हैं। फुटेज के आधार पर संदिग्धों की पहचान, आने-जाने का समय और वाहन की जानकारी आसानी से मिल जाती है। यही वजह है कि अब शातिर गिरोह तकनीक को ही निशाना बना रहे हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि वारदात के दौरान अपराधी मोबाइल फोन का प्रयोग नहीं करते, जिससे लोकेशन ट्रेसिंग से बचा जा सके। पुलिस चोरी वाली रेडियस में मोबाइल ट्रेस करती है कि कितनी देर तक एक्टिव रहा है, इसलिए कई मामलों में ऐसा सामने आया कि शातिर मोबाइल लेकर गए ही नहीं थे।
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बड़े घरों में पहले सीसी कैमरों पर नजर
पहले की चोरी की वारदात और बांसी और डुमरियागंज में हुई चोरी की बड़ी वारदातों के पहलुओं को देखा जाए तो शातिर बड़े और संपन्न घरों को टारगेट कर रहे हैं। ये वारदातें दर्शाती हैं कि अपराधी पहले रेकी करते हैं और घर में लगे सुरक्षा उपकरणों की पूरी जानकारी जुटाते हैं। मकान या दुकान पर पहुंचने के बाद सीधे उनकी नजर सीसीटीवी कैमरे पर होती है, जिसे वे देखते हुए जाते हैं। अगर कैमरा पहुंच तक है तो तोड़ देते हैं। अगर ऊपर है तो डीवीआर ही उठा ले जाते हैं। इसके लिए साथ ही चेहरे ढककर काम कर रहे हैं, जिससे अगर पड़ोसी के कैमरे में नजर भी आ जाएं तो चेहरा ढका होने के कारण उनको ट्रेस भी न किया जा सके। तकनीकी के जानकारों का मानना है कि अब अपराध का तरीका पारंपरिक नहीं रहा। तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ अपराधी भी तकनीकी रूप से सतर्क हो गए हैं। ऐसे में केवल सीसी कैमरा लगाना पर्याप्त नहीं बल्कि क्लाउड स्टोरेज, रिमोट बैकअप और अलार्म सिस्टम जैसी उन्नत सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत बढ़ गई है।
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बोले जिम्मेदार
चोरी के घटना का पर्दाफाश करने के लिए पुलिस की अलग-अलग टीम लगी है। आसपास के कैमरे को सर्च किया जा रहा है। जल्द ही मामले का पर्दाफाश किया जाएगा।
प्रशांत कुमार प्रसाद, एएसपी
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