सिद्धार्थनगर। बांसी तहसील मुख्यालय पर 50 बेड का मिनी जिला अस्पताल संचालित किया जाएगा। इसके लिए मंगलवार देर शाम तीन सर्जन सहित 11 डॉक्टरों की तैनाती कर दी गई। इसके अस्तित्व में आने से बांसी के अलावा डुमरियागंज और इटवा क्षेत्र की 10 लाख से अधिक आबादी को स्वास्थ्य सेवाओं का फायदा मिलेगा।
मरीज माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज न जाकर यहीं पर इलाज और जरूरत पर सर्जरी करवा सकेंगे। क्योंकि, जो तीन सर्जन तैनात किए गए हैं, वह सर्जरी के माहिर माने जाते हैं। वहीं, अस्पताल को मॉडल के रूप में विकसित किया गया है, जो सभी सुविधाओं से लैस है।
जिले की आबादी तकरीबन 30 लाख के करीब पहुंच चुकी है। स्वास्थ्य सेवाओं जिस प्रकार से होनी चाहिए वह जिले में नहीं थी। जिला अस्पताल से माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज बना तो लोगों को लगा कि स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर हो जाएंगी।
स्वास्थ्य सेवाएं तो बेहतर हुईं, लेकिन जिला अस्पताल का अस्तित्व ही समाप्त हो गया था। वहीं, बांसी, इटवा और डुमरियागंज तहसील मुख्यालय पर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं न होने से मरीजों को बस्ती या फिर जिला मुख्यालय पर इलाज के लिए जाना पड़ रहा है।
इसमें आने-जाने में मरीजों को बहुत परेशानी होती है। दौड़भाग भी बढ़ जाती है। बावजूद इसके उनका इलाज हो जाए, इसकी कोई गारंटी नहीं है। बांसी में मिनी जिला अस्पताल शुरू हो जाने के बाद अब इन तीन तहसील के मरीजों को इलाज में परेशानी नहीं होगी। बांसी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को ध्वस्त करके मॉडल अस्पताल बनाया गया है। इसे मिनी जिला अस्पताल के रूप में विकसित किया गया है।
तीन तहसील क्षेत्र की जनता को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिल सके और भागदाैड़ न करना पड़े। इसके लिए मंगलवार देर रात एक साथ 11 डॉक्टरों की तैनाती कर दी गई। इसमें चार सर्जन भी शामिल हैं। अस्पताल में ओटी की व्यवस्था अच्छी है। ऐसे में सर्जरी में लोगों को सहूलियत मिलेगी। आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में लगभग 10 लाख की आबादी के लिए यह अस्पताल सुविधाओं का केंद्र रहेगा।
इस संबंध में सीएमओ डॉ. आरके चौरसिया ने बताया कि बांसी अस्पताल के लिए डॉक्टरों की तैनाती कर दी गई। अब वहां पर लोगों को और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी।