सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु में चल रहे ‘’सिद्धार्थ उत्सव’’ में तीसरे दिन बुधवार को विविध शैक्षणिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं खेलकूद कार्यक्रमों का सफल आयोजन हुआ। दिनभर चले आयोजनों में विद्यार्थियों की उत्साही भागीदारी और शिक्षकों का सक्रिय सहयोग देखने को मिला। कवि सम्मेलन में लोगों ने खूब तालियां बजाईं।
उत्साह की शुरुआत आभासी पटल पर आयोजित ‘’विकसित भारत 2047 में महिलाओं का योगदान’’ विषय वेबिनार से हुई। इसमें मुख्य वक्ता के रूप में गोरखपुर विश्वविद्यालय की कला संकाय की अधिष्ठाता एवं उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा चयन बोर्ड की पूर्व अध्यक्ष प्रो. कीर्ति पांडेय तथा गोरखपुर विश्वविद्यालय की प्रो. सुधा यादव ने महिलाओं के विभिन्न क्षेत्रों में योगदान, सामाजिक एवं संस्थागत चुनौतियों, तथा सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं और नीतियों पर विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम का संयोजन डॉ. शिल्पी एवं डॉ. किरण गुप्ता ने किया।
इसके पश्चात विद्यार्थियों की रचनात्मक एवं आलोचनात्मक सोच को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से ‘’कृत्रिम बुद्धिमत्ता : वरदान अथवा अभिशाप’’ विषय पर वाद–विवाद प्रतियोगिता आयोजित की गई। इसमें उन्होंने युवाओं को आगे की संभावनाओं के बारे में रूबरू कराया। आभासी सत्र में दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान, भोपाल के निदेशक डॉ. मुकेश मिश्रा ने छात्रों को भारतीय जीवन पद्धति के सोलह प्रमुख संस्कारों के महत्व से अवगत कराया। इसमें प्रो. हरीश कुमार शर्मा, डॉ. विशाल गुप्त, डॉ. ह्रदय कुमार पांडेय सहित कई प्रतिष्ठित विद्वानों ने अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संयोजन प्रो. सत्येंद्र कुमार दुबे एवं डॉ. आभा द्विवेदी ने किया। संवाद