गांधी स्मारक संयुक्त जिला अस्पताल कहने के लिए 100 बेड का है। मगर व्यवस्थाएं इस लायक भी नहीं हैं कि 50 बेड पर मरीजों को बेहतर सुविधाओं के साथ रखा जा सके। आम लोगों के लिए बने जनरल वार्ड की स्थिति पर ही नजर दौड़ाएं तो स्थिति भयावह नजर आती है। वार्ड में लगी ज्यादातर खिड़कियां खुली हुई हैं।
शीशा क्षतिग्रस्त हो चुका है। पर्दे भी नहीं लगे हैं। खिड़कियों की दूसरी तरफ गंदगी का ढेर है। झाड़ियों के बीच से उठती तेज हवा सीधे वार्ड में प्रवेश कर रही है। बेड के ऊपर पीला पॉलीथिन बिछा हुआ है, जो ठंड में और ज्यादा ठंडी का अहसास करा रहा है। पर्याप्त कंबल भी नहीं मिले हैं ताकि मरीज उसे ओढ़कर ठंड से बचाव कर सकें।
दिन तो फिर भी किसी तरह गुजर जा रहा है, मगर रात ठंड से ठिठुरते हुए करवटें बदलने में ही बीत जाती है। यह बात दीगर है कि मरीजों के परिजनों ने अपनी ओर से रजाई, गद्दे की अतिरिक्त व्यवस्था जरूर कर रखी है। शिकायत करने वालों से अस्पताल प्रशासन दो टूक में संसाधन न होने का रोना रो रहा है। अब भला मरीज करें भी तो क्या।
इस संबंध में मुख्य चिकित्सा अधीक्षक रुचस्मति पांडेय ने बताया कि खिड़कियों पर शीशा, किवाड़ और पर्दे लगाने के लिए बजट की मांग की गई है। निदेशालय से बजट प्राप्त होते ही यह व्यवस्था की जाएगी। कंबल, गद्दा सहित अन्य सुविधाएं जहां तक मिलती है, दी जा रही है।