मतदान के बाद हुए बवाल के बाद बढ़नी चाफा में दहशत और तनाव का माहौल है। चप्पे-चप्पे पर पुलिस और पीएसी मुस्तैद है। गांव संगीनों के साए में कैद है। रविवार को सभी दुकानें बंद रही। पूरे दिन सड़कों पर सन्नाटा छाया रहा।
भयभीत ग्रामीण घरों में दुबके रहे। दहशत इस कदर है कि घटना के बारे में कोई कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। जुबां खुल भी रही है तो सिर्फ यही बोल फूट रहे हैं कि न जाने यह सब कैसे हो गया।
हालांकि दोपहर बाद राजनेताओं के पहुंचने से कुछ देर के लिए सन्नाटा टूटा। बढ़नी चाफा ग्राम पंचायत डुमरियागंज ब्लॉक के चंद बड़े गांवों में शुमार है। यहां लोगों को अमन पसंद है।
यही कारण है कि इससे पहले कभी कोई बड़ा विवाद भी यहां नहीं हुआ। मगर ग्राम प्रधान की कुर्सी ने वर्षों पुरानी परंपराओं को तोड़ दिया। मतदान के बाद हुए बवाल को लेकर गांव का हर कोई आहत है।
हालांकि सुरक्षा बलों की धमक के कारण लोग खुलकर तो नहीं बोल रहे, मगर दबी जुबान से घटना पर अफसोस जताने और जिम्मेदारों को कोसने से बाज नहीं आ रहे।
नाम न छापने की शर्त पर एक बुजुर्ग ने बताया कि मतदान की शुरुआत बेहद शांतिपूर्ण हुई थी। दोपहर तक हालात सामान्य था, मगर शाम को अंतिम क्षणों में न जाने क्या हो गया, जो हिंसा पर उतर आए।
इस बात का काफी मलाल है। घर के बाहर झांकते एक शख्स का कहना था कि प्रधान की कुर्सी को प्रत्याशियों ने प्रतिष्ठा से जोड़ लिया था। नतीजा पूरा गांव शर्मसार है।
घटना के लिए कुछ लोग पुलिस-प्रशासन को जिम्मेदार बताने से नहीं कतरा रहे। उनका कहना है कि अगर पुलिस-प्रशासन ने संयम दिखाया होता तो इतना बड़ा विवाद न होता। बढ़नी चाफा में हुए बवाल के बाद रविवार को हियुवा के प्रदेश प्रभारी राघवेन्द्र प्रताप सिंह कार्यकर्ताओं के साथ गांव पहुंचे।
गांव में भ्रमण कर ग्रामीणों से घटना के बारे में जानकारी ली। उन्होंने एक पार्टी विशेष को लाभ पहुंचाने के लिए पुलिस-प्रशासन पर फर्जी वोट डलवाने का आरोप लगाया। कहा कि इसका विरोध करने वालों पर प्रशासन ने उत्पीड़नात्मक कार्रवाई की है। उधर, सांसद जगदंबिका पाल ने अस्पताल पहुंचकर घायल बाबूलाल वर्मा का हाल पूछा और घटना के बारे में जानकारी ली।