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Siddharthnagar News: अलीगढ़वा में नहीं है कस्टम कार्यालय, यात्रियों को होती है परेशानी

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भारत नेपाल सीमा अलीगढ़वा। संवाद
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-बड़े वाहनों के नहीं आने-जाने से अलीगढ़वा के लोगों को नेपाल जाने के लिए जाना पड़ता दूसरे बॉर्डर
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-सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, मेडिकल कॉलेज व पर्यटन के लिए जरूरी है रूट
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। अलीगढ़वा सीमा के पार नेपाल के कपिलवस्तु जिले की सीमा स्थित चाकरचौड़ा में छोटी भंसार (कस्टम कार्यालय) बनकर तैयार है। भारत में कस्टम कार्यालय नहीं बनने से यात्रियों को समस्याओं का सामना करना पड़ता है। बड़े वाहनों से आने वाले लोगों को बार्डर के दूसरी तरफ वाहन छोड़कर पैदल आना पड़ता है। अलीगढ़वा में कस्टम कार्यालय बनने से सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं, जिले के मेडिकल कॉलेज में दवा करवाने आने वाले नेपाली नागरिकों और पर्यटकों को विशेष सुविधा मिलेगी।
कस्टम कार्यालय नहीं होने के कारण अलीगढ़वा सीमा पर भारत-नेपाल के चार पहिया वाहन एक दूसरे की सीमा में प्रवेश नहीं कर पाते हैं। इस कारण असुविधा और नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। जबकि कस्टम कार्यालय शुरू होने पर दोनों देशों के राजस्व में भी वृद्धि होगी। कस्टम कार्यालय बनने से सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में विदेशी छात्र-छात्राओं की संख्या बढ़ने में आसानी होगी। वहां, शुल्क जमा करके वाहन पड़ोसी देश की सीमा में जा सकेंगे। कस्टम कार्यालय नहीं होने से नेपाली मेहमान भारत में आने से कतराते हैं। अधिक आवश्यक कार्य होने से 100 किमी का चक्कर लगाना पड़ता है। अन्य देशों से आए पर्यटक नेपाल के लुंबनी में आने के बाद दूरी अधिक होने से भारत के स्तूपों का भ्रमण नहीं करना चाहते हैं। ककरहवा बॉर्डर पर बड़ी बसों के बंद होने से पर्यटक आने में भी परेशानी जताते है। जबकि कस्टम कार्यालय खुलने से लुंबिनी से कपिलवस्तु स्तूप की दूरी 20 किमी ही बचेगी।
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पैदल आती-जाती हैं दुल्हनें
सिद्धार्थनगर। भारत-नेपाल के युवक-युवतियों की शादी एक-दूसरे पड़ोसी देश में होती रही है। अलीगढ़वा सीमा पर बरात आती है तो दूल्हा-दुल्हन गाड़ी से सजी हुई कार से उतर कर पैदल सीमा पार करते हैं। उसके बाद दूसरी गाड़ी में बैठकर घर जाते हैं। इससे आर्थिक नुकसान भी होता है। कस्टम कार्यालय बनने के बाद स्थानीय लोगों का निर्धारित सीमा तक शुल्क माफ होता है।
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दोनों देश का संबंध बहुत पुराना है। जिले में गौतम बुद्ध से जुड़े अनेक धरोहर मिलते रहते हैं। जिसका उल्लेख अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर किया जाता है। जिसे घूमने आने के लिए पर्यटकों के पास केवल सोनौली बॉर्डर ही सहारा है। अलीगढ़वा के पास अनेक धरोहर मिलते हैं। गौतम बुद्ध की जन्म स्थली भी 20 किमी की दूरी पर है। ऐसे में कस्टम कार्यालय नहीं होने से पर्यटक के साथ विश्वविद्यालय के छात्रों को भी असुविधा होती है।
प्रो अभय कुमार श्रीवास्तव, प्राचार्य बुद्ध विद्या पीठ
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अलीगढ़वा बॉर्डर पर कस्टम कार्यालय खोलने के लिए कई बार मांग की गई थी। विश्वविद्यालय सहित कपिलवस्तु का विकास करने के लिए कस्टम कार्यालय का होना जरूरी है। इससे विश्वविद्यालय में नेपाली छात्रों की संख्या भी बढ़ेगी। विश्वविद्यालय में कार्यक्रम होने पर विदेशी अतिथियों को भी पैदल आना पड़ता है। इससे लोगों को असुविधा का सामना करना पड़ता है। दोनों देशों का संबद्ध मजबूत बनाने के लिए कस्टम कार्यालय का होना जरूरी हैं।
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प्रदीप कुमार पांडेय, असिस्टेंट प्रोफेसर समाजशास्त्र
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अलीगढ़वा में कस्टम कार्यालय बनाने के लिए शासन से पत्राचार किया गया है। शासन से मंजूरी मिलते ही अलीगढ़वा बार्डर पर कस्टम कार्यालय बनवाने का कार्य शुरू करवा दिया जाएगा। जिससे नेपाली व भारतीय नागरिकों को असुविधा नहीं होने पाए।
जयेंद्र कुमार, सीडीओ
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