सिद्धार्थनगर। शहर के भीमापार में एनएच निर्माण में गंगाराम की जमीन का अधिग्रहण सरकार ने कर लिया। इससे मिले मुआवजे से उन्होंने दो बेटियों की शादी धूमधाम से की। वहीं, बार्डर एरिया डेवलपमेंट की सड़क में भूमि जाने पर मिले मुआवजे की राशि से ठोठरी क्षेत्र के दीपक ने लग्जरी वाहन खरीद लिया।
नौगढ़-बांसी रोड पर कटया के पास एसएसबी मुख्यालय बनाने के लिए सौ से अधिक किसानों की भूमि अधिग्रहित हुई। इससे मिले मुआवजे की राशि ने कई किसानों की जीवनशैली बदल दी। सोनवल, कटया दूबे, नगरा, करौंदा मसिना गांव के कई किसान परिवारों ने मुआवजे की राशि से मकान बनाने के साथ ही लग्जरी वाहन खरीद लिया, जिससे इनके घर के सामने गाय व भैंस की जगह बाइक और चार पहिया वाहन नजर आ रहे हैं।
ये कुछ ऐसे उदाहरण हैं, जिनसे समझा जा सकता है कि जमीन अधिग्रहण के रूप में मिली भारी-भरकम राशि कैसे किसानों की जीवनशैली में बदलाव लाने में कारगर रही। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों की आर्थिक एवं सामाजिक स्तर में तेजी से बदलाव आया। कुछ किसानों ने अपनी पुश्तैनी मिल्कियत को बढ़ाने में योजनाबद्ध तरीके से निवेश किया। खेती जाने पर जो मुआवजा मिला, उससे शहर में जमीन खरीद ली आलीशान मकान बनवा लिया। गाड़ी के भी मालिक हो गए। दरअसल, अन्य शहरों की तर्ज पर शहर का दायरा बढ़ा तो यहां के कई लोग रातोंरात लाखों-करोड़ों के मालिक बन गए। तेजी से आर्थिक और सामाजिक बदलाव भी हुआ। लेकिन, पूर्वांचल में भौकाल के साथ जीने का सोच नहीं बदला। अधिकतर किसान परिवारों ने मुआवजे की राशि को अनावश्यक व दिखावे में खर्च कर दिया।
एक दशक में 60 वर्ग किमी से अधिक बढ़ा शहर का क्षेत्रफल
10 वर्ष पूर्व 2011 में जिले के संपूर्ण क्षेत्रफल 2867.28 वर्ग किमी में से 2837.58 किमी ग्रामीण क्षेत्र था और 29.7 वर्ग किमी शहरी क्षेत्र था। शहरी क्षेत्र का दायरा अब 90 वर्ग किमी हो चुका है। मात्र तीन वर्ष में नगर पालिका सिद्धार्थनगर और नगर पंचायत शोहरतगढ़ की सीमा विस्तार के साथ ही पांच नई नगर पंचायतों के गठन से ही नगरीय क्षेत्र का दायरा बढ़ गया। इससे जिले के 1199 ग्राम पंचायतों में 66 ग्राम पंचायतें शहरी क्षेत्र में शामिल हो गईं। जिससे अब जिले में सिर्फ 1136 ग्राम पंचायतें ही हैं। शहरी क्षेत्र में पकड़ी चौराहा और सनई चौराहे तक नई कॉलोनियों का निर्माण तेजी से हो रहा है, जो बढ़ रही शहरी परिवेश का नजारा पेश कर रहे हैं।
इन निर्माण कार्यों से मिला किसानों को मुआवजा
शहर के अंदर ककरहवा-बस्ती एनएच में ओवरब्रिज और बाईपास निर्माण में किसानों की भूमि गई और सनई के निकट एसएसबी मुख्यालय के स्थापना में पांच गांवों की भूमि गई। जिसका उन्हें मुआवजा मिला। इसके अलावा नेपाल सीमा पर इंडो नेपाल बार्डर डेवलपमेंट एरिया सड़क में कई किसानों की भूमि गई है। अब खलीलाबाद श्रावस्ती रेल लाइन बिछाने में किसानों की भूमि अधिग्रहित हो रही है।
डेढ़ बीघा गई तो खरीदी 22 बीघा भूमि
भीमापार में डेढ़ बीघा भूमि एनएच में चली गई, जिससे मिले मुआवजे की राशि 3.24 करोड़ रुपये से शहर के निकट ही बड़गो में 22 बीघा भूमि खरीद ली, जिससे बच्चों का भविष्य सुरक्षित रहे।
- श्याम नरायण चौबे, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ब्राह्मण महासभा
ट्रैक्टर-जमीन खरीदने के साथ बनवाया घर
दो बीघा भूमि बार्डर एरिया डेवलपमेंट सड़क में गई थी, जिससे मिले 40 लाख रुपये मुआवजे से ट्रैक्टर, जमीन खरीदने के साथ घर बनवाया।
- सुकई, चरिगवां
शहर में जमीन खरीद बनवाया मकान
बार्डर एरिया सड़क में चार बीघा भूमि गई, जिससे मिले 96 लाख रुपये मुआवजे से जिला मुख्यालय पर भूमि खरीद मकान बनवाने के साथ ही अन्य स्थानों पर भूमि खरीद ली। जीतेंद्र तिवारी, चरिगवां
इलाज कराया और घर बनवाया
बार्डर डेवलपमेंट एरिया रोड में चार मंडी खेत चला गया था। जिसका मुआवजा 9.20 लाख रुपये मिला था। इससे सबसे पहले अपना इलाज कराया और उसके बाद बचे धन से घर बनवाया।
अब्दुल हकीम, बजहा
हर माह बिकती है 50 से 55 गाड़ियां
शहर के बराबर ही अब गांवों में भी गाड़ियां जा रही हैं। हमारे यहां हर महीने करीब 50 से 60 गाड़ियां बिकती हैं, इसमें 20 से 25 गाड़ियां तो उन ग्रामीण क्षेत्रों में ही जाती हैं, जहां किसानों की भूमि सरकार ने अधिग्रहित की है, इन क्षेत्रों को देखकर लगता है कि अब गांवों के लोगों में भी लग्जरी गाड़ियों का शौक बढ़ा है।
- अजय दूबे उर्फ सोनू, शोरूम मैनेजर, स्मार्ट व्हील प्राइवेट लिमिटेड
ये गांव हाल में नगर में शामिल हुए
नगर पालिका सिद्धार्थनगर के सीमा विस्तार में 15 से अधिक गांव शामिल हुए, जिनमें शहरीकरण की तर्ज पर विकास हो रहा है और नई कॉलोनियां बस रहीं हैं। नगर पालिका में शामिल होने वाले गांवों में थरौली, भीमापार, बसडिलिया, मधुकरपुर, पिपरा पांडेय, सनई, पकड़ी, परसा शाहआलम, परसा महापात्र, रेहरा, सेमरनार आदि हैं। इनके अलावा नए नगर पंचायत कपिलवस्तु, इटवा, बिस्कोहर, बढ़नीचाफा व भारतभारी में कई गांव शामिल होकर शहरीकरण की राह पर है।
पैसा लगाने से पहले करें जांच पड़ताल
जमीन में पैसा लगाने वाले लोग पहले पूरी जांच पड़ताल कर लिया करें, ताकि उनका पैसा किसी विवाद में न फंसे। ये उनकी भी जिम्मेदारी होती है। उचित स्थान पर पैसे का निवेश सुरक्षित और उनके भविष्य के लिए हितकर होगा।
- डॉ. ललित कुमार मिश्र, एसडीएम नौगढ़
समझदारी से निवेश कर आने वाली पीढ़ी का भी बना सकते हैं भविष्य
जमीन से लोगों की भावनाएं जुड़ी रहती हैं। इसलिए, बहुत से लोग इसे बेचते नहीं हैं। मगर इससे नई या आने वाले पीढ़ी को कोई लाभ नहीं मिलेगा। यदि किसी के पास विशेषकर शहर से सटे क्षेत्रों में अतिरिक्त जमीन है तो वह उसे बेचकर समझदारी से निवेश करें तो इससे आने वाली पीढ़ी भी तरक्की की राह पर दौड़ सकेगी। इसी तरह छोटी-छोटी निर्माण इकाई खोलकर भी आय का नियमित साधन जुटाने के साथ ही कई लोगों को रोजगार भी दिए जा सकते हैं।
- राजेश श्रीवास्तव, आर्किटेक्ट