डुमरियागंज। अमरगढ़ शहीद स्थल जहां 26 नवंबर 1858 को प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान डुमरियागंज के पूर्वजों ने निहत्थे होकर अंग्रेजों से लड़ाई लड़ी। इसके बाद वे लोग अंग्रेजी सैनिक के हमले में शहीद हो गए। अंग्रेज सरकार के आंकड़ों के अनुसार इस संग्राम में 80 भारतीयों को गोलियों से शहीद कर दिया गया था। सैकड़ों लोगों को राप्ती नदी में डुबो दिया गया था। आक्रोशित लोगों ने अंग्रेज अधिकारी गिल्फोर्ड को मार डाला था। इसके प्रमाण कैलिफोर्निया और ब्रिटिश गजेटियर में भी अंकित हैं।
मौके पर अंग्रेज अधिकारी की कब्र और शहीद गेट बना है। इस क्रांतिकारी घटना के मुख्य प्रेरणास्रोत नाना साहब के भाई बालाराव व मोहम्मद नवाज थे। अमरगढ़ के वीर सपूतों को उनकी शहादत का सिला आज तक नहीं मिल पाया है। हालांकि अमरगढ़ के शहीदों को उनकी पहचान और सम्मान दिलाने के लिए पिछले तीन वर्ष से पूर्व विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह के प्रयास से शहीद स्मारक बनवाने के साथ ही अमरगढ़ शहीद स्थल पर तीन दिवसीय अमरगढ़ महोत्सव और शहीद सम्मान यात्रा निकालकर अमरगढ़ की वीर गाथा को लोगों को बताने के साथ ही इसे राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का प्रयास किया जाता रहा है।
पूर्व विधायक की ओर से अमरगढ़ के शहीदों की याद में बेंवा चौराहे बजरंगी चौक पर शहीद स्मृति स्थल तथा विशाल झंडा स्थापित किया गया है।