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Siddharthnagar News: नदी बढ़ रही, गांव सिमट रहे... कटान की जद में मकान, बाग और सड़कें

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बढ़नी ब्लाक के झुंगहवा-झुलनीपुर मार्ग बाढ़ के पानी से कटी हुई।  
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नदियों के बदलते रास्ते और कटान के चलते बदल गई कई गांवों की तस्वीर
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सिद्धार्थनगर। नदियों के बदलते रास्ते और कटान के चलते कई गांवों की तस्वीर बदल गई है। ऐसे ही बूढ़ी राप्ती नदी के नया रास्ता बनाने के चलते उसका क्षेत्र में छितरापार गांव के आधे से अधिक लोगों के घर नदी कटान में समा चुके है। पूर्व में लगभग एक किमी दायरे में बसे 1800 आबादी वाला यह गांव वर्तमान में सिमट कर 500 मीटर दायरे में हो गया है। नदी के रास्ता बदलकर यू आकार में मुड़ने के कारण गांव के रास्ते, स्कूल और लोगों के खेत व बाग नदी में विलीन हो गए।
अब कटान की जद में गांव में स्थित मां दुर्गा का मंदिर और उसका लखनापार बांध आ गया है। हालांकि सिंचाई विभाग ने यहां पर बचाव कार्य कराए, लेकिन जहां ठोकर लगे नदी की तेज धार से दूसरी जगह पर कटान होने लगा। कुछ ऐसा ही हाल जिले के 35 से अधिक बाढ़ प्रभावित गांवों का है जहां नदी कटान से गांव का नक्शा ही बदल गया है।
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तुलसियापुर प्रतिनिधि के अनुसार बढ़नी ब्लाक के दक्षिणी छोर पर बालानगर आदि गांवों में कई घर कटान से नदी विलीन हो चुके है। यहां बूढ़ी राप्ती, बानगंगा, घोरही, सोतवा, सुरही आदि नदी व नालों के किनारे स्थित गांवों व टोलों के लोगों को अभी से बाढ़ का डर सता रहा है। यहां के तौलिहवा, खैरी शीतल प्रसाद, तालकुंडा, मटियार उर्फ भुतहवा, खैरी उर्फ झुंगहवा, गड़रखा आदि गांव व टोले लगभग हर वर्ष बाढ़ की चपेट में रहते हैं। लोगों का कहना है कि तीन-चार ऐसे कटान स्थल हैं, जहां समय रहते बचाव कार्य अगर हो जाए तो लोगों को बाढ़ के समय डर नहीं रहेगा। बढ़नी ब्लॉक के तौलिहवा ग्राम के बालानगर में 2014, 2016 व 2017 में आई बूढ़ी राप्ती नदी में बाढ़ से कई घर नदी में समा गए। तब से अब तक कटान को रोकने का कोई प्रयास नहीं किया गया। इटहिया के पास बूढ़ी राप्ती नदी ने झुंगहवा-झुलनीपुर मार्ग को सितंबर 2021 में काट दिया था।
यहां झुंगहवा से प्रतापपुर तक सात किलोमीटर मार्ग का निर्माण तो किया लेकिन नदी की ओर से काटी गई सड़क को छोड़ दिया गया। यहां भी बूढ़ी राप्ती नदी अपनी दिशा बदलकर कटान करते हुए खैरी शीतल प्रसाद की आबादी के करीब पहुंच गई है। 2017 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निरीक्षण के दौरान ग्रामीणों ने स्थाई ठोकर की मांग की थी, लेकिन अभी तक यहां बचाव कार्य नहीं हुआ। क्षेत्र के मो. रफीक, गोली पासवान, निसार अहमद, राकेश राजभर, कोदई साहनी, कुंजी, रामधनी आदि ने कहा कि सड़क कटान स्थल पर मरम्मत एवं बचाव कार्य हो जाता तो कई गांव के लोगों को सुविधा होती।

नदी की धार बदलने से बनते है नए कटान स्थल
जिले के विभिन्न संवेदनशील और अति संवेदनशील कटान स्थलों पर सिंचाई विभाग की ओर से हर वर्ष बचाव कार्य कराए जाते है। कटान स्थलों पर बने इन ठोकरों पर बाढ़ के समय नदी की तेज धार पड़कर मुड़ने से दूसरी जगहों पर नए कटान स्थल बन जाते है और वहां कटान होने पर आसपास के लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। राप्ती नदी द्वारा जोगिया क्षेत्र में अमरिया कटान स्थल, बूढ़ी राप्ती नदी द्वारा छितरापार, तिवारीडीह समेत कई स्थानों पर नए कटान स्थल बन गए है। यहां पुराने कटान स्थलों पर बचाव कार्य कराए गए, लेकिन नए कटान स्थल बनने के बाद लोगों के मकान, खेत और बाग नदी में विलीन हो रहे है।

1.44 लाख हेक्टेयर भूमि होती है बाढ़ प्रभावित
जिले के संपूर्ण क्षेत्रफल लगभग तीन लाख हेक्टेयर में 1.44 लाख हेक्टेयर भूमि बाढ़ से प्रभावित रहती है। हर वर्ष आने वाली बाढ़ से इन क्षेत्रों के किसानों की फसल बाढ़ के पानी के कई दिन तक खेत में रहने के कारण नष्ट हो जाती है। इससे किसानों का जहां खेती में लगी जमापूंजी डूब जाती है, वहीं फसल नष्ट होने से उनके सामने खाद्यान्न संकट खड़ा हो जाता है। इनमें राप्ती नदी से नौगढ़, बांसी, डुमरियागंज व इटवा तहसील के सर्वाधिक 450 से अधिक गांव बाढ़ से प्रभावित होते है। वहीं बूढ़ी राप्ती से शोहरतगढ़ समेत चार तहसीलों के 270 गांव, कूड़ा से 150, जमुआर से 40, घोरही नाला से 35, परासी से 80 गांव प्रभावित होते है।
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15 से 20 जून तक सक्रिय होंगे बाढ़ चौकियां व राहत केंद्र
जिला प्रशासन व सिंचाई विभाग की ओर बाढ़ आपदा के दौरान बचाव एवं राहत कार्यों के लिए बाढ़ चौकियों एवं राहत केंद्रों को 20 जून से सक्रिय किया जाएगा। इसके तहत यहां पर 15 जून तक कर्मचारियों की तैनाती करने के साथ ही अन्य इंतजाम किए जाएंगे। संबंधित तहसीलों के एसडीएम के नेतृत्व में स्थापित बाढ़ चौकियों के जिम्मे बांधों की निगरानी, नदियों के जलस्तर की निगरानी, बाढ़ के दौरान प्रभावित क्षेत्रों में बचाव आदि कार्य होता है। वहीं 10 से 15 गांवों में राहत कार्य के लिए एक राहत केंद्र की स्थापना होगी। यहां पर तहसील एवं ब्लॉक से कर्मचारियों की तैनाती करने के साथ जिम्मेदारी आवंटित की जाएगी।
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बाढ़ पूर्व की समस्त तैयारियां की जा रही है, सिंचाई विभाग को कटान स्थलों व बांधों के मरम्मत एवं बचाव कार्य के निर्देश दिए गए है। इसमें लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
गौरव श्रीवास्तव, एडीएम
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