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सूरज उगते ही किरणों की मानिंद उमड़़े मतदाता

Tue, 28 Feb 2017 12:02 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
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पुरानी नौगढ के जवाहर लाल इंटर कालेज के बूथ पर मतदाताओं की लगी लाइन। - फोटो : अमर उजाला
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सिद्धार्थनगर। लोकतंत्र के महापर्व का उत्साह लोगों के सिर चढ़कर बोला। जोश और जज्बे की बदौलत मतदाता नई इबारत लिखने को आतुर दिखे। पिछली बार सबसे पीछे रहे कपिलवस्तु (सदर) क्षेत्र के मतदाताओं में आगे निकलने की होड़ रही। यहां सूरज उगते ही किरणों की मानिंद मतदाता बूथों पर उमड़ पड़े थे। दिन चढ़ने के साथ वोटिंग का प्रतिशत भी बढ़ता गया। अपराह्न 3 बजे ही मतदाताओं ने वर्ष 2012 का आंकड़ा (49.47 प्रतिशत) पार कर लिया। अमूमन हर बूथ पर मतदाता दो गुटों में साफ बंटे नजर आए। मुख्य लड़ाई में हर ओर सपा और भाजपा ही दिखीं।
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शहर से सटे रौंवापार बूथ पर सुबह साढ़े सात बजे 50 से अधिक मतदाता कतार में थे। तेतरी बाजार, थरौली, कृष्णानगर, पुरानी नौगढ़ के बूथों पर भी मतदाताओं की लंबी कतार थी। बर्डपुर के बूथ नंबर 36 पर सुबह 9 बजे तक 106 वोट पड़ चुके थे। बूथ नंबर 40, 41, 42 पर भी 11 फीसदी से अधिक का वोटिंग प्रतिशत रहा। बूथों पर लगी कतारों में महिलाओं की अधिक तादाद से पहले मतदान-फिर जलपान का नारा सार्थक दिख रहा था। सुबह 11 बजे तक पूरे विधानसभा क्षेत्र में 27.81 प्रतिशत मतदान संपन्न हो चुका था और हर बूथ पर 20-25 लोग कतार में थे। मधुबेनिया में बने बूथ संख्या 93 पर 35 प्रतिशत और 94 पर 23 प्रतिशत तक वोट हुए थे। बूथ संख्या 46, 47, 48, 51, 52, 53 और 54 के मतदाताओं में बीएलओ के रवैए के प्रति नाराजगी दिखी। यहां वोटर पर्ची नहीं बटी थी।
दोपहर 12 बजे के बाद मतदान की रफ्तार सुस्त पड़ गई। बूथों पर सन्नाटा पसरने लगा था। अपराह्न 2 बजे तक यह स्थिति बनी रही। इस समय तक लोटन के भुसौला अदाई बूथ 850 में 332, धरकौली में 803 में 389, हरिवंशपुर में 1385 में से 525 और ठोठरी में 1042 में से 445 मतदाताओं ने वोट दिया था। तीन बजे के बाद मतदान में फिर से तेजी शुरू हुई। वर्ष 2012 में इस सीट पर भाजपा प्रत्याशी पूर्व केंद्रीय मंत्री श्रीराम चौहान की करारी हार हुई थी, मगर इस बार भाजपा ने जोरदार वापसी करते हुए सपा प्रत्याशी व मौजूदा विधायक विजय पासवान को कड़ी टक्कर दी। हर बूथ पर इन दोनों में ही कड़ा मुकाबला बना रहा। शहरी क्षेत्र में मतदाता जहां विकास के साथ प्रत्याशी के व्यक्तित्व पर वोट देते दिखे तो ग्रामीण क्षेत्र में जाति-धर्म की लहर हावी थी।
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