राहुल त्रिपाठी
सिद्धार्थनगर। चोट लगने पर डॉक्टर मरीजों को इलाज के साथ ही आराम करने की सलाह देते हैं, लेकिन यहां तो इलाज के दौरान ही लगने वाली दौड़ से दर्द बढ़ जाता है। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में घायल को इलाज कराने के लिए तीन भवनों का चक्कर लगाना पड़ रहा है। ऐसे में मरीज को दर्द में आराम मिलने की बजाय दर्द और भी बढ़ जाता है।
सोमवार को भी चोट लगने व फ्रैक्चर के मरीज ओपीडी में चिकित्सक को दिखाने, एक्स-रे व प्लास्टर कराने के लिए अलग-अलग भवनों का चक्कर लगाते देखे गए, जिससे वह दर्द से राहत पाने की जगह कराहते नजर आए।
मेडिकल कॉलेज में आर्थो के मरीजों के लिए नई व्यवस्था तो की गई, लेकिन अब वही व्यवस्था उन्हें और भी दर्द दे रही है। मेडिकल कॉलेज में वर्तमान में आर्थोपेडिक्स के मरीजों को तीन भवन का चक्कर लगाकर उपचार करवाना पड़ रहा है, जबकि अस्पताल परिसर के अंदर सड़क जर्जर हो चुकी है, और जगह-जगह गड्ढे हो गए हैं, जिससे चोट लगने पर इलाज कराने पहुंचे मरीज प्रतिदिन दर्द झेल रहे हैं।
माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज के नए भवन में पर्चा काउंटर के साथ ही आर्थोपेडिक्स का ओपीडी भी बनाया गया है, लेकिन वहीं एक्स-रे की व्यवस्था पुराने भवन में ही है। इससे मरीज डॉक्टर को दिखाने के बाद पुराने भवन में एक्स-रे करवाने के लिए जाता है।
जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद वह एक बार फिर डॉक्टर के पास नए भवन में रिपोर्ट दिखाने आता है। इसके बाद डॉक्टर लगभग 400 मीटर दूर ट्राॅमा सेंटर में मरीज को प्लास्टर करवाने के लिए भेजते हैं। इतनी प्रक्रिया पूरा करने में ही मरीज को पूरा दिन लग जाता है, जबकि इसके साथ घायल व्यक्ति का दर्द भी बढ़ जाता है।
सोमवार को करीब 12:00 बजे तक आर्थोपेडिक्स में 30 मरीज का उपचार किया गया था। सुबह करीब 10:00 बजे आर्थोपेडिक्स में उपचार करवाने आए डुमरियागंज के समीर के हाथ में चोट लगी थी। समीर ने बताया कि वह सुबह करीब 10:00 बजे मेडिकल कॉलेज आए हैं, पर्चा कटवाने के बाद डॉक्टर को दिखाया तो एक्स-रे जांच लिख दी।
एक्स-रे करवाने के लिए पुराने भवन में जाना पड़ा। उसके बाद रिपोर्ट डॉक्टर को दिखाई। तो डाॅक्टर ने कहा कि हाथ में क्रैक है, प्लास्टर करवाना पड़ेगा। प्लास्टर के लिए ट्राॅमा सेंटर में जाना पड़ा। वहां से दवा लेने के लिए नए भवन आना पड़ा। इतनी जगहों का चक्कर काटने में दोपहर के 2:0 बज गए।
समीर ने बताया कि यदि किसी मरीज के पैर में चोट लग जाए तो वह मेडिकल कॉलेज की इस व्यवस्था में दर्द से आराम के बजाय और भी पीड़ित हो जाएगा। मरीज के साथ आए तीमारदार को भी दुश्वारी झेलनी पड़ती है। संवाद