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नगर तय नहीं है सरकारी बस के रुकने का ठिकाना

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नगर में तय नहीं है रोडवेज बस के ठहरने का ठिकाना
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रोडवेज डिपो से निकलने के बाद सीधी जाती हैं बसेें
यात्रियों को बस पकड़ने में होती है दिक्कत, प्राइवेट बस से यात्रा करना मजबूरी
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। नगर में रोडवेज से निकलने के बाद सरकारी बसों को ठहराव का को ठिकाना नहीं है। यात्री या तो रोडवेज तक जाएं या फिर प्राइवेट का सहारा लें, तभी वह अपने मंजिल तक पहुंच पाते हैं। कारण बस निकलने के बाद सीधे फर्राटा भरते हुए नगर से निकल जाती हैं। पहले खड़े किसी यात्री के रोकने पर अगर रुकीं तो ठीक, नहीं तो वह प्राइवेट साधन से यात्रा करें। लोगों का कहना है कि रोडवेज से निकलने के बाद कम से कम दो से पांच मिनट बस रोकी जाएं तो लोगों को सहूलियत मिलेगी।
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नौगढ़ रोडवेज से दिल्ली, कानपुर, लखनऊ, इलाहाबाद, बाराबंकी, गोरखपुर, गोंडा, बस्ती सहित अन्य रूट के लिए बसें चलती हैं। इसमें गोरखपुर, लखनऊ और बस्ती के लिए लगभग नियमित सवारी निकलती है। समस्या यह है कि डिपो से निकलने के बाद नगर से बाहर होने की दूरी डेढ़ किलोमीटर है। मगर इसी बीच में बस के ठहराव का कोई उचित स्थान तय नहीं है कि रोडवेज तक नहीं पहुंचने वाला यात्री वहां इंतजार करके बस की यात्रा कर सकें। ऐसे में जिससे बस छूटी वह प्राइवेट से ही सफर करता है। नगर के संतोष ने कहा कि अक्सर गोरखपुर और लखनऊ की यात्रा करते हैं। बस पकड़नेे के लिए रोडवेज जाना पड़ता है। डिपो से निकलने के बाद नगर में कुछ तय स्थान रहता जहां पांच मिनट बस रुकतीं तो लोगों को और सहूलियत मिलती। वहीं पिंटू पाठक ने कहा कि अगर गोरखपुर जाना हो तो रोडवेज जाना ही पड़ेगा। क्योंकि वहां से बस छूटने के बाद हाथ देते रहिए नहीं रुकेंगी। रोडवेज से नगर की सीमा में बस के ठहराव का स्थान तय होना चाहिए, जिससे यात्रियों को सहूलियत मिले। कारण प्राइवेट बस वाले अधिक किराया वसूल करते हैं। इस बाबत एआरएम नौगढ़ रोडवेज जगदीश प्रसाद ने कहा कि डिपो से बस निकलने के बाद जहां यात्री हाथ देते हैं, रुकती हैं। फिर भी अगर समस्या है तो इसका समाधान किया जाएगा।
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