सिद्धार्थनगर। जिले में चल रही गैस सिलेंडर की कमी के बीच मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह कार्यक्रम में भोजन व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन ने पारंपरिक तरीका अपनाते हुए लकड़ी के चूल्हों पर भोजन बनवाया। इससे न केवल कार्यक्रम सुचारु रूप से संपन्न हुआ बल्कि संकट की स्थिति में स्थानीय संसाधनों के उपयोग का भी संदेश मिला।
कार्यक्रम में 331 नवदंपतियों, उनके परिजनों और अतिथियों को मिलाकर करीब आठ हजार लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था करनी थी। कमर्शियल गैस की उपलब्धता न होने के कारण रसोइयों ने पारंपरिक लकड़ी के चूल्हों का सहारा लेकर भोजन तैयार किया। इसके बावजूद भोजन व्यवस्था में किसी प्रकार की बाधा नहीं आई और सभी लोगों को समय पर भोजन उपलब्ध कराया गया।
कार्यक्रम स्थल पर मौजूद कई लोग आपस में यह चर्चा करते भी सुने गए कि प्रशासन चाहता तो रसोई गैस का उपयोग भी कर सकता था, लेकिन ऐसा न करके यह संदेश दिया गया कि नियम सबके लिए समान हैं और संकट की स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था अपनाई जा सकती है।
इस व्यवस्था ने यह भी दिखाया कि आधुनिक संसाधनों के अभाव में भी पारंपरिक तरीके आज भी उपयोगी और व्यवहारिक हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से उपयोग में आने वाले लकड़ी के चूल्हे संकट की स्थिति में एक भरोसेमंद विकल्प बन सकते हैं।
जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने कहा कि वैकल्पिक रूप से लकड़ी के चूल्हों पर भोजन बनवाया गया, जिससे यह संदेश भी जाता है कि संकट की स्थिति में पारंपरिक संसाधन भी उपयोगी और प्रभावी विकल्प साबित हो सकते हैं।