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Siddharthnagar News: तस्करों का गठजोड़.. बवाल में नेपाल से भी आए थे उपद्रवी

Thu, 10 Oct 2024 12:05 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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बढ़नी कस्बे में बवाल शांत होने के बाद सामने आ रहा हकीकत- बवाल को देखते हुए बुला लिए गए थे नेपाल के लोग
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर बढ़नी। नेपाल बार्डर से सटे बढ़नी कस्बे में हुए बवाल में तस्करी का गठजोड़ खुलकर सामने आया है। बंदी के दौरान शुरू हुए पथराव में दो पक्ष आमने-सामने हुए थे तो उपद्रवियों में नेपाली नागरिक भी दिखे थे। हालांकि, मौके पर अधिकारी पहुंचे तो उन्होंने नेपाल के कृष्णानगर से आए लोगों को वापस जाने को कहा। अब माहौल शांत हुआ है तो बाॅर्डर पर बढ़नी और नेपाली क्षेत्र के तस्करों के गठजोड़ की चर्चा हो रही है।
पुलिस प्रशासन ने उपद्रव के दौरान दंगा भड़काने की कोशिश करने वालों को चिह्नित करके जेल भेजने की कार्रवाई के दौरान हर बिंदुओं पर चर्चा हो रही है। आरोपियों की धर पकड़ के साथ अधिकारियों की नजर तस्करी पर भी है। उनका मानना है कि तस्करी करने वालों के हौसले बुलंद हैं और बवाल में उनकी भूमिका अधिक रही है। बॉर्डर पर बकरों के झुंड को हाक दिया जाता है और वे चरते हुए नो मेंस लैंड पार करते हैं तो नेपाल के तस्कर बकरे को पकड़ लेते हैं और उनकी कीमत डेढ़ गुनी हो जाती है, जबकि गैर परंपरागत रास्ते से मछली की तस्करी होती है। मीट को बॉर्डर पार भेजना प्रतिबंधित है, इसलिए इसकी तस्करी में कमाई ज्यादा होती है।
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बवाल के दौरान बाजार बंद करवाने वाले समर्थकों ने एक घर की छत से पत्थरबाजी का आरोप लगते हुए उस घर में पत्थरबाजी करने वालों के छिपे होने की बात करते हुए उन्हें प्रशासन से घर से बाहर निकालने की बात करने लगे, क्योंकि झड़प के बाद लोगों में चर्चा की थी कि बंदी के दौरान कस्बे के नहीं, नेपाल से लोग आए थे। झड़प के दौरान अज्ञात चेहरे अधिक दिखे थे, जिनकी वीडियो देखने के बाद भी पुलिस प्रशासन उन्हें पहचान नहीं पा रहा है। जब पुलिस ने लाठी भांजनी शुरू की तो वह मौका पाकर भाग खड़े हुए। इसके बाद उन लोगों पता ही नहीं चला। यह मामला एक सवाल बनकर रह गया।
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तस्करी की गठजोड़ से नेपाल से बवाल के दौरान पहुंचे 25 से 30 की संख्या लोग

बढ़नी कस्बा नेपाल बार्डर पर स्थित है। नेपाल से भारत व भारत से नेपाल में तस्करी होना आम बात है। जिस पर पूरी तरह सुरक्षा एजेंसियां नकेल कसने सफलता नहीं पाई है। आज कल भारत से बकरे व मछली की तस्करी बड़ी जोरों पर है। बकरे की तस्करी करना नेपाल बार्डर से सटे कस्बे से बहुत आसान है। लोगों अपनी बकरियां सीमा के आसपास चराने के लिए ले जाते हैं। जैसे ही मौका मिलता है। भारत से नेपाल बकरे को पहुंचा देते हैं। नेपाल सीमा पर तस्कर रहते है, किस झुंड से कितनी बकरे आई। उसका हिसाब लगाकर बकरे की कीमत चुका देते हैं और नेपाल में प्रतिकिलो के हिसाब दुगना मुनाफा कमाते हैं। भारत में बकरे की कीमत 600 रुपये के हिसाब से एक किलोग्राम मिलता है, और नेपाल भारतीय रुपये 900 रुपये किलोग्राम मिलता है, जिससे तस्कर मोटी रकम कमाई करते है। इसी तरह मछली भारत में 150 से लेकर 300 रुपये में प्रति किलोग्राम अगल-अलग तरह की मछलियां मिलती हैं। वहीं, नेपाल यही मछली 200 से 400 रुपये प्रति किलोग्राम भारतीय रुपये में मिलता है।
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यहां से आते हैं बकरे, ऐसे होती है तस्करी
तस्कर सीमा से सटे बकरे पालने वालों से संपर्क में रहते हैं। तस्कर बहराइच सहित आदि जगहों से बकरा खरीद कर बकरा पालने वालों सौंप देते हैं। उसके बाद बकरा पालने वाला सीमा की तरफ बकरे की झुंड ले जाता हैं। उसी दौरान मौका देखकर बकरा इस पार उस पर कर दिया जाता हैं और मछली की भी तस्करी भी नोमेंस लैंड की ओर से मौका मिलते ही उस पर पहुंचा दिया जाता है। इससे भारतीय सीमा के एक समुदाय से नेपाल में रह इस समुदाय में बड़ा गठजोड़ रहता है। इसी गठजोड़ की वजह से बवाल के दिन 25 से 30 की संख्या में लोग आ गए थे।
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बवाल के दिन नेपाल से आए हुए लोगों की जांच कराई जाएगी। घटना के हर बिंदुओं पर जांच की जा रही है। आरोपियों के बारे में जानकारी भी जुटाई जा रही है। तस्करी के मामले में जांच कर कार्रवाई की जाती है। बॉर्डर पर और पैनी नजर रखी जा रही है।
-सुजीत राय, सीओ शोहरतगढ़
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