- लगातार तेज आवाज सुनने से पर्दे पर पड़ रहा असर, ऑपरेशन की आ रही नौबत
- माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल के नाम कान, गला रोग विभाग में हर दिन पहुंच रहे मरीज
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। अगर तेज आवाज में फोन पर घंटों सुनने की आदत है तो सतर्क हो जाएं, क्योंकि इससे कान पर्दा कमजोर हो रहा है और ऑपरेशन की नौबत आ जा रही है। चौंकाने वाली बात यह है कि मरीजों में 15-40 वर्ष की आयु के लोगों की संख्या अधिक है। विशेषज्ञों का कहना है कि मरीजों को ऑपरेशन तक करना पड़ रहा है। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में प्रतिदिन ऑपरेशन वाले पांच से आठ केस पहुंच रहे हैं। कुछ ही लोग ऑपरेशन को तैयार होते हैं। बाकी कम सुनाई देने वाली बीमारी का शिकार होकर घूम रहे हैं।
अधिक से अधिक लोग स्मार्टफोन का प्रयोग कर रहे हैं। कुछ लोग तो अधिकांश समय इयरफोन लगाकर बात करते हैं। ऑनलाइन पढ़ाई का भी सेहत पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। इयरफोन से तेज आवाज में सुनने से न सिर्फ सुनने की क्षमता कम हो रही है बल्कि दिमाग पर भी असर पड़ रहा है। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज के नाक, कान, गला रोग विशेषज्ञ चिकित्सक के कक्ष में नियमित पांच से आठ मरीज पहुंच रहे हैं। चिकित्सक बता दे रहे हैं कि मरीज को पहले 10-15 दिन की दवा दी जा रही है। इसके बाद ऑपरेशन की सलाह दी जाती है। कुछ ही लोग ऑपरेशन कराने के लिए तैयार होते हैं। अधिकांश दवा के सहारे जीवन जीते हैं, जो कि उनके लिए घातक हैं।
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इतनी है सीमा
डॉक्टर के मुताबिक ध्वनि स्तर को सामान्यतः डेसीबल (dB) में मापा जाता है। श्रवण हानि का जोखिम लगभग 70 डीबी से शुरू होता है। 85 डेसिबल या इससे अधिक ध्वनि के संपर्क में आने से आपकी सुनने की क्षमता खराब हो जाती है। एक सामान्य बातचीत लगभग 60 डेसिबल की ध्वनि पर रिकॉर्ड होती है। बुनियादी संचार, संतुलन, स्वास्थ्य और यहां तक कि मस्तिष्क की तीक्ष्णता के लिए आपके श्रवण स्वास्थ्य को संरक्षित रखना महत्वपूर्ण है। आपकी उम्र या श्रवण हानि की डिग्री चाहे जो भी हो, अत्यधिक शोर के संपर्क में आने को सीमित करना और लंबे समय तक तेज आवाजों के आस-पास रहने पर सुरक्षात्मक उपकरणों का उपयोग करना महत्वपूर्ण है।
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कितना सुनना हानिकारक
कोई नहीं 0–25 सामान्य सीमा के भीतर सुनना
हल्का 25–40 दूर की या धीमी आवाज में बात सुनने में कठिनाई
मध्यम 41–55 बातचीत सुनने में कठिनाई
मध्यम रूप से गंभीर 56–70 अधिकांश भाषण सुनने में कठिनाई
गंभीर 71–90 तेज आवाज और वातावरण की आवाजें सुनने में कठिनाई
गहरा -90 बहुत तेज आवाज सुनने में भी कठिनाई
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माह में होते हैं 30-50 ऑपरेशन
माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में कान के पर्दे की ऑपरेशन की दूरबीन विधि से करने की सुविधा है। आकड़ों के मुताबिक प्रतिमाह में 30-50 ऑपरेशन पर्दे के होते होंगे। यह आकड़े पिछते तीन साल से लगातार बढ़ रहे हैं। पीड़ितों में 15-40 वर्ष आयु वर्ग के लोग शामिल हैं। समस्या का कारण तेज आवाज के पास रहना और कई घंटे तक इयरफोन का प्रयोग करना मुख्य वजह है।
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बोले विशेषज्ञ
तेज आवाज हमेशा कान के लिए घातक है। अगर आप दो घंटे तक तेज आवाज में रहते हैं तो पर्दे पर जितना कई दिन में जोर पड़ना चाहिए वह उतने ही समय में पड़ जा रहा है। बाइब्रेशन से पर्दे कमजाेर पड़ जा रहा है। इसमें घंटों तक मोबाइल से इयरफोन लगाकर गाना सुनना और किसी मीटिंग को अटेंड करना भी बड़ी वजह है। अगर इनसे गुजर रहे हैं तो सतर्क हो जाएं और अगर कम सुनाई दे रहा है। सुनने में तकलीफ हो रही है, दर्द हो रहा है तो किसी विशेषज्ञ को जरूर दिखाएं। अनजान लोगों को दिखाने और ड्रॉप डालने से पर्दा और खराब हो सकता है।
डॉ. संजय कुमार शार्म, नाक कान गला रोग विशेषज्ञ, माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज