संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। अवैध रूप से अंग्रेजी शराब बनाने और ढक्कन, रैपर व शीशी की आपूर्ति करने वाले गिरोह के गुर्गे केवल यहीं तक सीमित नहीं थे। उनका नेटवर्क गोरखपुर और बस्ती में फैला था।
वह जनपद में पहली बार आपूर्ति देने के लिए आए थे, तभी हत्थे चढ़ गए। ऐसा पूछताछ में सामने आया है, लेकिन किस-किस से वे जुड़े थे। पुराने धंधेबाजाें से उनके संपर्क थे या नहीं, इसकी हकीकत जांची जा रही है।
वहीं, आबकारी विभाग गोरखपुर और देवरिया के अधिकारियों को अवगत कराया गया है। उनकी इस मूवमेंट की जानकारी मिलने के बाद अगर दुकान का नाम आएगा तो विभाग कार्रवाई करेगा। सीमावर्ती जनपद होने के कारण मिलावटी शराब के धंधे हाेने के मामले यहां अकसर सामने आते रहे हैं।
छह माह बीता नहीं कि नकली शराब बनाने का भंडाफोड़ हो जाता है। बीते वर्ष शहर के महनगा में अंग्रेजी शराब बनाने की फैक्टरी पकड़ी गई, केमिकल, बन शराब और ढक्कन, क्यूआर कोड आदि लाखों रुपये की कीमत का सामान बरामद हुआ। दो आरोपी जेल गए।
मामले की जांच चल रही थी कि जोगिया में बड़ी मात्रा में अंग्रेजी शराब के ढक्कन, रैपर, शीशी के साथ चार लोग पकड़े गए। दुकान से भी शीशी पकड़ी गई। दुकान पर कार्रवाई हुई।
अब सात जनवरी को एसओजी, आबकारी और उसका पुलिस ने अवैध शराब का धंधा चलाने वाले दो आरोपियों को दबोचा। बड़ी मात्रा में ढक्कन, शराब, शीशी और रैपर बरामद किए। पकड़े गए आरोपियों में एक देवरिया तो दूसरा गोरखपुर का निवासी था। पुलिस की जांच में पता चला कि गोरखपुर का आरोपी इस मामले में पहले भी जेल जा चुका है। उसकी असलियत जानने के लिए हिस्ट्री निकाली जा रही है।
इधर उसका पुलिस भी मामले की जांच कर रही है। सूत्रों की मानें तो पकड़े गए आरोपियों का मूवमेंट बस्ती, संतकबीनगर और गोरखपुर में अधिक रहा। वह सिद्धार्थनगर पहली बार आए थे। अब तक की पड़ताल में जो सामने आया है। पुलिस पूर्व के मामले को भी देख रही है कि कहीं उस गिरोह से तो कनेक्ट नहीं रहे। अगर रहे तो यह पहली बार नहीं होगा। कई बार आ चुके होंगे और दुकानदारों से तालुकात भी रहे होंगे। पुलिस मोबाइल फोन से भी जानकारी ले रही है।
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