धेंसा। पिपरा पांडेय में श्री भगवान परशुराम मंदिर शिलान्यास स्थल पर आयोजित श्रीविष्णु महायज्ञ कार्यक्रम में शुक्रवार को विजय राघवदास रामायणी ने राम वनवास की मार्मिक कथा का वर्णन किया।
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम का 14 वर्ष का वनगमन उनके त्याग, मर्यादा और जनकल्याण की भावना का प्रतीक है। श्रीराम ने पिता के आदेश को सर्वोपरि मानते हुए राज्य का त्याग कर वनवास स्वीकार किया। उनके साथ छोटे भाई लक्ष्मण और पत्नी सीता भी वनगमन पर गए।
उन्होंने बताया कि इतनी बड़ी परिस्थिति के बावजूद भगवान श्रीराम के मन में माता कैकेयी के प्रति किसी प्रकार की दुर्भावना नहीं थी, जो उनके आदर्श चरित्र को दर्शाता है। कथा के दौरान राम वनवास का प्रसंग सुनकर उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
इस अवसर पर अध्यक्ष देवनारायण पांडेय, राजविंद पांडेय, अजीत पांडेय, रामस्वरूप पांडेय सहित अन्य श्रद्धालु मौजूद रहे। संवाद