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Siddharthnagar News: जिले में वर्षों से चल रहा फर्जीवाड़ा कर सरकारी भूमि हथियाने का खेल

Fri, 25 Oct 2024 11:19 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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सिद्धार्थनगर/बांसी। शहर के निकट समेत जिले में कई जगह सरकारी भूमि हड़पने के लिए राजस्व अभिलेखों में फर्जीवाड़ा करने के मामले सामने आ चुके हैं। बांसी तहसील के ग्राम चवरताल में फर्जीवाड़ा कर सरकारी भूमि हड़पने के मामले में केस दर्ज कराने के बाद अन्य मामलों में भी कार्रवाई की मांग उठने लगी है। संबंधित क्षेत्र के राजस्व कर्मियों की मिलीभगत से फर्जीवाड़ा का यह खेल वर्षों से चल रहा है। वहीं बांसी में दर्ज मामले में पुलिस छानबीन में जुटी हुई है, लेकिन आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।
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चकबंदी अधिकारी बांसी पंकज कुमार की तहरीर पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर सरकारी भूमि को अपने बेटी के नाम कराने के मामले में बृहस्पतिवार को कोतवाली बांसी में मुकदमा पंजीकृत कराया है। मामला यह है कि बांसी तहसील के ग्राम चवरताल में फजलुरर्हमान निवासी जनियाजोत ने अपनी पुत्री को फर्जी तरीके से अदालत की पुत्री बताकर न्यायालय में सन 1359 फसली की फर्जी खतौनी प्रस्तुत करके नवीन परती के कई गाटों पर 14 जून 2013 को खतौनी में नाम दर्ज कराने का आदेश पारित करा लिया था। ग्राम चंवर ताल में सरकारी 90 बीघा भूमि को फर्जीवाड़ा कर अपने नाम कराने की जांच विभागीय जांच हुई। जांच में नकल खतौनी फर्जी पाए जाने पर चकबंदी अधिकारी बांसी को प्राथमिकी दर्ज कराने का निर्देश दिया गया था।
ऐसे ही एक मामला बांसी तहसील क्षेत्र के हाटा खास गांव में बीते वर्ष अक्तूबर माह में आया था जिसमें बंदोबस्त अधिकारी ने छह लोगों के कब्जे से 25 बीघा बंजर सरकारी भूमि मुक्त किए जाने का आदेश दिया था। हालांकि इस फैसले के खिलाफ लोगों ने उच्च न्यायालय में अपील किया गया है। एसओ बांसी रामकृपाल शुक्ल का कहना है कि चवरताल में फर्जीवाड़ा कर सरकारी भूमि हड़पने के मामले में केस दर्ज कर छानबीन की जा रही है। जल्द ही मामले में अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।
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बेसकीमती भूमि पर फर्जीवाड़ा कर दर्ज करा लिया नाम
शहर के निकट पकड़ी जोगिया मार्ग पर महदेवा तिवारी गांव के पास सड़क किनारे की बेसकीमती 12 बीघा भूमि को फर्जीवाड़ा कर एक व्यक्ति ने अपने नाम करा लिया। मामले में हुई शिकायत के बाद जांच में सामने आया कि तहसील कार्यालय में सरकारी बंजर भूमि होने के बावजूद बिना किसी अभिलेखीय साक्ष्य के ही तत्कालीन लेखपाल ने खतौनी में उक्त भूमि एक व्यक्ति के नाम से दर्ज कर दिया। मामले में चल रहा केस अंतिम चरण में है। अधिकारियों की मानें तो जल्द ही इस मामले में संबंधित व्यक्ति का नाम खतौनी में निरस्त कर सरकारी भूमि घोषित कर दिया जाएगा।
ऐसे चढ़ता है खतौनी में नाम
किसी व्यक्ति का नाम खतौनी में तब चढ़ता है जब वह संबंधित भूमि बैनामा कराता है, अथवा वरासत, वसीयत और पट्टा के माध्यम से भी नाम दर्ज किया जाता है। इसमें बैनामा भूमि की रजिस्ट्री के बाद स्टांप दाखिल करने के 35 दिन बाद खतौनी में नाम दर्ज होता है। वरासत में मृतक प्रमाण पत्र व परिवार रजिस्टर की नकल के साथ आवेदन करने पर वारिसों का नाम खतौनी में दर्ज होता है। वसीयत में कोर्ट में वाद दाखिल होने पर नोटिस जारी कर आपत्ति मांगने के बाद नाम चढ़ता है। पट्टा भूमि मामले में ग्राम पंचायत के प्रस्ताव के साथ आवेदन के बाद नायब तहसीलदार, तहसीलदार की रिपोर्ट मिलने पर एसडीएम के निर्देश पर खतौनी में नाम दर्ज होता है।
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