सिद्धार्थनगर। होली का त्योहार सिर पर है। बाजार रंगों से सज चुके हैं। गली-मोहल्लों से लेकर मुख्य सड़कों तक अबीर-गुलाल की खुशबू तैर रही है। हर दुकान पर रंगों की चमक लोगों को आकर्षित कर रही है लेकिन इस चमक के पीछे एक स्याह सच छिपा है। रंगों के इस उत्सव में मिलावटखोरों ने जहर घोलने की तैयारी कर ली है।
मोटी कमाई के चक्कर में मिलावटखोर अबीर और गुलाल में बालू मिलाकर वजन बढ़ा रहे हैं तो रंग को ज्यादा चटक बनाने के लिए सस्ते और हानिकारक केमिकल का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो आपकी त्वचा ही नहीं, आपके चेहरे को भी हमेशा के लिए बदरंग कर सकता है।
जिले में होली को लेकर रंग चढ़ने लगा। नगर के बर्डपुर मार्ग, स्टेशन रोड मुख्य बाजार है। इसके लिए बांसी, डुमरियागंज, शोहरतगढ़ और इटवा तहसील पर अबीर गुलाल से लेकर अन्य तैयारी हो चुकी है। मिलावटखोर मोटी कमाई के लिए महक के नाम पर रासायनिक सेंट मिला रहे हैं, जिनसे त्वचा रोग और एलर्जी का खतरा बढ़ रहा है।
वहीं, होलसेल बिक्री करने वालों से जानकारी ली गई तो पता चला कि जिले में रंग की 70 प्रतिशत आपूर्ति गोरखपुर और वाराणसी से होती है। बाकी 30 प्रतिशत अन्य बाजारों से आता है। पूरे जनपद की बात करें तो करोड़ों रुपये के रंगों का कारोबार हो रहा है। वहीं, दर के बारे में जानकारी ली गई तो 30 रुपये किलो से लेकर 200 रुपये किलो तक की अबीर बाजार में आ चुके हैं।
बाजार से जुड़े मो. अनीश के मुताबिक, सस्ते वाले अबीर में बालू और झूल का प्रयोग होता है क्योंकि, होली के रंग में रंगे व्यक्ति को पता ही नहीं चलता कि वह क्या खरीद रहा है और इसमें क्या मिला है। वहीं, रंग की बात करें तो 700 से 1500 रुपये किलो तक का रंग बाजार में है, जो 100 ग्राम, 50 ग्राम के हिसाब से बिक्री किया जाता है।
दुकानदार ने बताया कि गाढ़ा और चटक करने के लिए इसमें केमिकल का इस्तेमाल होता है। कमोबेश इसी तरह का खेल पूरे जनपद में चलता है। सूत्र बताते हैं कि, कम कीमत वाले रंगों में वजन बढ़ाने के लिए बालू या महीन धूल मिलाई जाती है। रंग को गाढ़ा और चटक दिखाने के लिए इंडस्ट्रियल डाई और सस्ते केमिकल डाले जाते हैं, जो त्वचा और आंखों के लिए खतरनाक हो सकते हैं।
केमिकल मिलाकर रंगों को करते हैं चटक : जानकारों के अनुसार, मिलावटखोर रंग चटक दिखे, इसके लिए केमिकल का इस्तेमाल कर रहे हैं। लेड ऑक्साइड काला या गहरा रंग देने के लिए, क्रोमियम आयोडाइड व क्रोमियम यौगिक हरा रंग चटक करने के लिए, कॉपर सल्फेट चमकदार हरा रंग देने के लिए, मरक्यूरिक सल्फाइड लाल रंग गाढ़ा करने के लिए, कर रहे हैं। इन रंगाें के इस्तेमाल से चेहरे को नुकसान पहुंच सकता है।
त्वचा रोग विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे रंगों से चेहरे पर लाल दाने, खुजली, जलन, सूजन, एलर्जी, पिग्मेंटेशन और मुहासे जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
इससे त्वचा में जलन और लंबे समय में स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। मिलावटी रंगों से आंखों में जलन और अस्थायी अंधापन तक का खतरा हो सकता है।