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मनरेगा से संवरेगी चार सागरों की सूरत

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मनरेगा से संवरेगी चार सागरों की सूरत
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जमींदारी नहर प्रणाली के इन सागरों का होगा जीर्णोद्धार
ड्रेनेज खंड ने शासन को भेजा 223 लाख की कार्ययोजना
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। अंग्रेजों के समय में स्थापित जमींदारी नहर प्रणाली की स्थिति सुधरने वाली है। सागरों के जरूरत के कार्य होने से अंतिम छोर तक सिंचाई की सुविधा मिलेगी और फसल अच्छी होगी। इस प्रणाली के तहत 12 सागरों का उपयोग सिंचाई कम, मछली पालन के लिए अधिक उपयोग हो रहा है। मनरेगा के तहत ड्रेनेज खंड की ओर से चार सागरों के जीर्णोद्धार के लिए 223 लाख की कार्ययोजना शासन को भेजी गई है। स्वीकृति मिलने के बाद इन सागरों की सूरत बदलेगी ही, किसानों को सिंचाई के लिए वैकल्पिक व्यवस्था नहीं ढूंढनी पड़ेगी।
किसानों के लिए बेहतर सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने की गरज से अंग्रेजों के जमाने में स्थापित जमींदारी नहर प्रणाली मृतप्राय: हो चुकी है। इस प्रणाली से महली, बजहा, सिसवा, मरथी जैसे 12 सागरों की स्थापना की गई थी। इन सागरों से लगभग दो दर्जन नहरों का जाल बिछाया गया है। अंग्रेजों के जमाने में इस प्रणाली का लाभ भरपूर मिला, पर देश की आजादी के बाद प्रणाली की पूरी व्यवस्था सिंचाई विभाग के ड्रेनेज खंड के हवाले हो गया। देश की अनोखी जमींदारी नहर प्रणाली वेंटीलेटर पर पहुंच चुकी है। जमींदारी नहर प्रणाली का निर्माण ब्रिटिश शासनकाल में तत्कालीन अंग्रेज जमींदारों द्वारा लगभग 150 वर्ष पूर्व किया गया था। इस प्रणाली में नेपाल की सीमा पर अथवा सीमा के पास 10 अदद जलाशयों, दो अदद रेगुलेटर का निर्माण किया गया, जिनसे कुल 243.00 किमी. नहरें निकाली गई हैं। इस नहर प्रणाली का सीसीए 21116 हेक्टेयर व सिंचाई हेतु प्रस्तावित क्षेत्र खरीफ में सीसीए का 20 प्रतिशत अर्थात 4221 हेक्टेयर और रबी में 15 प्रतिशत अर्थात 3166 हेक्टेयर है। डीएम दीपक मीणा की पहल पर ड्रेनेज खंड ने मनरेगा के तहत जिन सागरों के जीर्णोद्धार के लिए 223 लाख की कार्ययोजना बनाकर भेजी हैं, उनमें बजहा, मोती, सिसवा, शिवपति सागर शामिल हैं।
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घट गई सिंचाई की क्षमता
डेढ़ सौ वर्ष पूर्व बनाई गई बजहा, मरथी, मझौली, सेमरा, बटुआ और सिसवा झीलें आज बुरी दशा में हैं। सागरों की सफाई नहीं होने से उनमें निरंतर गाद और सिल्ट भरती जा रही है। गर्मियों में पहले उन झीलों में 325 मिलियन घन फुट पानी जमा होता था, मगर सिल्ट गाद के चलते यह क्षमता लगभग डेढ़ सौ घन फुट ही रह गई है। इससे सिंचाई क्षेत्र भी घटकर तीन हजार हेक्टेयर मात्र रह गया है। इन झीलों के तटबंध जर्जर हो चुके हैं। घास-फूस और सेवार ने सभी झीलों का सौंदर्य भी नष्ट कर दिया है।
मछली के ठेका से बर्बाद हो रही नहर
नहरों में मछली के शिकार का पट्टा होने के कारण सिंचाई की क्षमता में कमी आ रही है। किसानों की मांग बावजूद भी मछली का ठेका बंद नहीं हुआ। राज्यसभा सदस्य बृजलाल ने भी मछलियों के शिकार का ठेका पर रोक लगाने के लिए पत्र जिला प्रशासन को पत्र भेजा है।
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जमींदारी नहर प्रणाली अंतर्गत सागरों और नहरों के बारे में मौजूदा हालात की विस्तृत जानकारी लेकर जीर्णोद्धार की दिशा में किस स्तर पर ठोस और सकारात्मक पहल की गई है। इसके तहत चार सागरों के जीर्णोद्धार के लिए मनरेगा से 223 लाख की कार्ययोजना बनाकर शासन को भेजी गई है।
- पुलकित गर्ग, मुख्य विकास अधिकारी
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