सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते मुख्य वक्ता लक्ष्मी नारायण भाला।
- फोटो : सीएचसी एलिया के अंदर जन औषधि केंद्र में बिक रहीं ब्रांडेड दवाओं को देखते सीएमओ।
सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के विधि विभाग के तत्वावधान में हमारा संविधान भाव और रेखांकन विषय पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। इसमें समाज चिंतक, प्रखर राष्ट्रवादी विचारक, लेखक-कवि एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के आजीवन प्रचारक लक्ष्मीनारायण भाला से महाराष्ट्र मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। मुख्य वक्ता लक्ष्मी नारायण भाला ने कहा कहा कि मौलिक अधिकारों से संबंधित भाग में राम राज्य की अवधारणा न्यायपूर्ण शासन और नागरिक गरिमा का प्रतीक है। जबकि, राज्य के नीति निदेशक तत्वों में गीता के विचार सेवा, त्याग और कर्तव्यपरायणता की प्रेरणा देते हैं।
मुख्य वक्ता ने यह भी उल्लेख किया कि बाद में आमजन के बीच जो संविधान की मुद्रित प्रतियां आईं, उनमें इन चित्रों को हटा दिया गया, जिससे नई पीढ़ी इन प्रतीकात्मक भावों से अपरिचित होती गई। उन्होंने कहा कि इन चित्रों पर गंभीर शोध एवं अध्ययन की आवश्यकता है, जिससे विद्यार्थी संविधान की मूल भावना, सांस्कृतिक आधार और राष्ट्रीय दृष्टि को समझ सकें। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे संविधान के सांस्कृतिक आयामों को समझते हुए राष्ट्रीय एकता, कर्तव्यनिष्ठा और नागरिक चेतना को आत्मसात करें।
विश्वविद्यालय की कुलपति कविता शाह ने कहा कि भारतीय संविधान केवल विधिक दस्तावेज नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की एक जीवंत मार्गदर्शिका है। उन्होंने सभी संकायों के विद्यार्थियों से संविधान के गहन अध्ययन, उसके प्रतीकों और मूल भावों को समझते हुए एक जागरूक, उत्तरदायी और श्रेष्ठ नागरिक बनने का आह्वान किया। कार्यक्रम में अतिथि परिचय एवं स्वागत उद्बोधन अधिष्ठाता कला संकाय एवं विधि संकाय की समन्वयक प्रो. नीता यादव की ओर से प्रस्तुत किया गया तथा आभार ज्ञापन अधिष्ठाता वाणिज्य संकाय प्रो. सौरभ ने किया। कार्यक्रम का प्रभावी संचालन विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. अविनाश प्रताप सिंह ने किया। इस अवसर पर कुलसचिव डॉ. अश्वनी कुमार, परीक्षा नियंत्रक दीनानाथ यादव, पूर्व अधिष्ठाता एवं छात्र कल्याण प्रो. हरीश कुमार शर्मा, विज्ञान संकाय की अधिष्ठाता प्रो. प्रकृति राय, डॉ. आशुतोष श्रीवास्तव, डॉ. सरिता, डॉ. सरिता सिंह, डॉ. आशुतोष वर्मा, डॉ. लक्ष्मण सिंह, डॉ. जय सिंह यादव आदि मौजूद रहे।