बर्खास्तगी के एक साल बाद भी नहीं हुई वेतन की रिकवरी
38 बर्खास्त शिक्षकों का है मामला : 22 बर्खास्त शिक्षक उठा चुके हैं एक करोड़ से अधिक वेतन
नीरज मिश्र
सिद्धार्थनगर। 38 शिक्षकों की बर्खास्तगी के एक साल बाद भी वेतन ले चुके करीब 22 शिक्षकों से रिकवरी नहीं की जा सकी है। ये शिक्षक एक करोड़ से अधिक वेतन ले चुके हैं। सूत्रों के मुताबिक जांच कर रही पुलिस टीम को वेतन संबंधी पूर्ण विवरण न दिए जाने से पुलिस भी धन की रिकवरी नहीं करा पा रही है।
जुलाई 2016 में प्रदेश सरकार की ओर से 16448 सहायक अध्यापकों की भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई थी। इसमें से जिले में 600 पदों पर नियुक्ति होनी थी। जांच में इस भर्ती प्रक्रिया के 38 शिक्षकों की डिग्री फर्जी मिली। इस पर सभी को एक साल पूर्व बर्खास्त कर दिया गया था। इसमें से 26 की गिरफ्तारी हुई तो यह पता चला कि इनमें से करीब 22 ऐसे शिक्षक थे, जो करीब एक करोड़ रुपये वेतन ले चुके हैं। वहीं बीएसए राम सिंह ने बताया कि रिकवरी के लिए वित्त एवं लेखाधिकारी को निर्देशित किया गया है। जिन शिक्षकों ने वेतन उठाया है। उनका पूरा ब्योरा भी मांगा गया है। वहीं विभाग के वित्त एवं लेखाधिकारी फिलहाल एक माह से अवकाश पर हैं।
एसटीएफ भी नहीं उगलवा पाई राज
विभागीय जानकारों की माने तो पहले सत्यापन का काम लिपिकों के जिम्मे था। उन्हें यह पता होता था कि किसका सत्यापन करना है और किसका नहीं। इसी आधार पर अधिकारियों की मिलीभगत से फर्जी शिक्षकों का सत्यापन कर उन्हें वेतन दिया जाता रहा। इस मामले में एसटीएफ ने लिपिक धर्मेंद्र कुमार और फर्जी शिक्षक प्रकरण से जुड़े राकेश सिंह को गिरफ्तार भी किया। बावजूद इसके दोनों से न तो एसटीएफ ने यह राज उगलवा पाई और न ही विभाग। ऐसे में यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि इनकी पहुंच कितनी ऊपर तक है।
किसी भी बीएसए की भी नहीं हुई जांच
शिक्षकों की बर्खास्तगी के बाद राकेश सिंह और धर्मेंद्र की गिरफ्तारी हुई, तो पूछताछ में कुछ बेसिक शिक्षा अधिकारियों के नाम भी दोनों ने बताए बावजूद इसके किसी भी बीएसए पर कार्रवाई नहीं हुई। हालांकि सहायक अध्यापकों की भर्ती प्रक्रिया के दौरान जिले में विनोद राय, अरविंद कुमार पाठक, अजय सिंह और मनीराम सिंह बतौर बीएसए तैनात रहे। सूत्र बताते हैं कि बिना अधिकारियों की मिलीभगत से इतना बड़ा खेल संभव ही नहीं है।