-जनपद में बढ़ने लगा तापमान, दोपहर में 43 डिग्री तक पहुंच जा रहा
- पिछले वर्ष की तुलना में 3 डिग्री अप्रैल में अभी से अधिक हो गया है तापमान
-धूप से बचने के लिए लोग ले रहे छतरी और गमछे का सहारा, प्रशासन ने विद्यालयों का समय बदला
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। तराई राजस्थान जैसी तपने लगी है। बृहस्पतिवार दोपहर में पारा 44 डिग्री को छू गया है। हाल यह है कि जहां सड़कें गुलजार हुआ करती थीं। वहां लू की वजह से कर्फ्यू जैसे हालात नजर आ रहे हैं। दोपहर में बहुत कम ही लोग सड़क पर दिखाई दिए। जो लोग निकले, उन्हें बहुत जरूरी था, तभी निकले। छतरी, गमछा से लोग खुद को बचाते हुए नजर आए।
आने वाले दिनों में तापमान की स्थिति की बात करें तो सुधार के बजाए और गंभीर हालात उत्पन्न वाले हैं। क्योंकि अगले दो से तीन दिन में तापमान के 46 डिग्री के पार पहुंचने का अनुमान है। वहीं, लू के शिकार मरीजों के इलाज और व्यवस्था की बात करें तो मेडिकल कॉलेज में कोल्ड रूम की बात करें तो 10 बेड का वार्ड आरक्षित कर दिया गया है। मरीज आने के बाद और बढ़ाने की बात कही जा रही है। वहीं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की बात करें तो कुछ स्थानों पर सुविधाएं हैं और कुछ जगह पानी तक की व्यवस्था नहीं है। जबकि, हीटवेव को लेकर तैयार रहने के लिए शासन की ओर से निर्देश जारी किए जा चुके हैं।
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नगर में दिखे ये हालात
सुबह 10:00 बजे तक ही पछुआ के साथ पारा चढ़ने लगा और दोपहर के 12:00 बजे तक आग बरसने लगी। हवा के साथ जमीन तपने लगी। हालात यह थे कि बाहर निकलने के बाद जैसे लग रहा था कि शरीर में पानी ही नहीं बचा है। क्योंकि हवा तो गर्म थी ही और जमीन तपने लगी। दोपहर में तापमान 43.7 डिग्री तक पहुंच गया। जो इसी सीजन का सर्वाधिक, बल्कि चार वर्ष में 24 अप्रैल को तापमान 43 डिग्री नहीं छू पाया था। शहर में देखा गया, जहां पूरे दिन वाहनों की आवाजाही जारी रहती थी। वहां शहर के उसका मार्ग, बर्डपुर, स्टेशन रोड और कलेक्ट्रेट के सामने दोपहर 12-2 बजे के बीच संख्या कम दिखी। वही लोग दिखाई पड़े जिन्हें बहुत जरूरी था, जिनके घर में मांगलिक कार्यक्रम था। मुकदमे की तारीख और अन्य जरूरी काम था।
अशोक मार्ग पर मेडिकल कॉलेज इलाज के लिए आने वालाें का सिलसिला जारी रहा है। लू से बचने के लिए कोई छतरी लगाए था, तो कोई गमछे से मुंह ढके था। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज को देखा गया। जहां हीटवेव के मरीजों के लिए 10 बेड का वार्ड क्रियाशील कर दिया गया है। जहां एसी सहित अन्य सुविधा है। साथ ही 10 बेड जरूरत पड़ने पर बढ़ाने की तैयारी है। डॉक्टर बहुत जरूरी न हो तो बाहर नहीं निकलने की सलाह दे रहे हैं। उनका कहना है कि सुबह अधिकतम नौ बजे तक काम करें। शाम को पांच बजे के बाद ही निकलें। अगर निकलते हैं धूप से बचने की पूरी तैयारी जरूर रखें।
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पड़ताल में सीएचसी पर मिली ये व्यवस्था
तिलौली। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मिठवल तिलौली की पड़ताल की गई। इसमें देखा गया कि हीटवेव तैयारी के लिए वार्ड बना दिया गया है, जिसमें मानक के अनुसार कम से कम 4 बेड होना चाहिए। इसमें 4 बेड का वार्ड बना है, जिसमें कूलर लगा है और प्रति 2 बेड पर 1 सीलिंग फैन लगा है। l साथ ही आकस्मिक मरीजों के लिए आकस्मिक वार्ड में एयर कंडीशनर भी लगाया गया है। मानक के अनुसार आइस पैक भी उपलब्ध है और ओआरएस, पैरासिटामोल, आरएल, एनएस भी उपलब्ध है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर रोजाना 12 से 15 मरीज इमरजेंसी वार्ड में देखे जाते हैं।
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तेज धूप व लू के बीच शुद्ध पेयजल का अभाव ,नहीं बना ओआरएस काॅर्नर
भनवापुर। पीएचसी भनवापुर में प्रतिदिन करीब 80 से सौ मरीज इलाज कराने आते हैं। तेज धूप के साथ चल रही गर्म हवाओं से जहां लोगों में हीटवेव का खतरा बढ़ गया है, वहीं पीएचसी भनवापुर में शुद्ध पेयजल के अभाव के साथ ही ओआरएस काॅर्नर भी नहीं बनाया गया है। पीएचसी भनवापुर का भवन नव निर्माण के लिए ध्वस्तीकरण करा दिया गया है। अस्पताल का संचालन गांव के पंचायत भवन में संचालित हो रहा है। पंचायत भवन परिसर में लगे इंडिया मार्का टू हैंड दूषित पानी दे रहा है। अपना इलाज कराने के लिए आने बाले मरीजों को बाहर से बोतल बंद पानी खरीदना पड़ता है। बृहस्पतिवार को डीहाईड्रेशन व लूज मोशन का इलाज करा रहे भनवापुर गांव निवासी 80 वर्षीय संतराम ने बताया कि यहां कोई सुविधा नहीं है। सबसे बड़ी समस्या शुद्ध पेयजल की है। गड़ावर गांव निवासी 60 वर्षीय रामसेवक ने बताया कि सुबह से पेट दर्द व पानी की कमी से जूझ रहा था। पीएचसी पर इलाज कराने आया हूं, प्यास लगी थी तो बाहर से 20 रुपये की बोतल बंद पानी खरीद कर पी रहा हूं। इन मरीजों का इलाज कर रहे फार्मासिस्ट प्रमात्मा प्रसाद चौधरी ने बताया कि ओआरएस का पैकेट है। जिन मरीजों को जरूरी समझा जाता है, उन्हें दिया जाता है। स्टाफ की कमी के कारण ओआरएस काॅर्नर नहीं बनाया गया है। वहीं, सीएचसी सिरसिया में कोल्ड रूम 20 बेड का बनाया गया है। साथ ही हीटवेव से बचने के लिए जरूरी सुझाव देते हुए जागरूक भी किया जाता है।
इस संबंध में अधीक्षक सीएचसी सिरसिया डॉ. शैलेंद्र मणि ओझा ने बताया कि पीएचसी भनवापुर पंचायत भवन में संचालित होने के कारण अव्यवस्था है,तथा स्टाफ की कमी के कारण ओआरएस काॅर्नर नहीं बनाया गया है। सीएचसी सिरसिया में ओआरएस काॅर्नर बनाया गया है, सीमित संसाधनों के साथ लोगों को बेहतर सुविधाएं देने का प्रयास किया जा रहा है।
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लू के लक्षण, पहचान होते ही कराएं इलाज
विशेषज्ञ के अनुसार लू लगने पर तेज बुखार, शरीर में गर्मी बढ़ना, पसीना न निकलना, सिरदर्द, अचानक चक्कर, उल्टी होना, जी मिचलाना, भ्रमित हो जाना, मांसपेसियों में ऐंठन का होना, त्वचा का लाल होना या सूखना आदि प्रमुख कारण है। अगर इसमें कुछ नजर आए तो सतर्क हो जाएं और तत्काल डॉक्टर के पास लेकर जाएं।
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लू लगने पर करें तत्काल उपचार
विशेषज्ञ के अनुसार अगर जानकारी हो जाए कि लू लगी है तो तत्काल व्यक्ति को छायादार वृद्ध के नीचे अथवा ठंडे स्थान पर ले जाएं। शरीर के तापमान को करने के लिए ठंडा पानी पिलाएं और ठंड तौलिये से शरीर पोछें जिससे तापमान को नियंत्रित किया जा सके। तरल पदार्थ का सेवन करें खूब पानी, जूस, नीबू पानी पिलाएं। ढीले और हल्के कपड़े पहनें, भारी भोजन करने से बचें आदि उपाय अपना सकते हैं।
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एक नजर पिछले वर्ष 24 अप्रैल के तापमान पर
तापमान के आंकड़ों पर गौर करें तो
साल अधिकतम न्यूनतम
2025 43.7 22.1
2024 42.7 23.1
2023 38.2 19.00
2022 40.1 20.1
2021 38.00 19.00
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बोले जिम्मेदार
कोल्ड रूम मेडिकल कॉलेज में बना दिया गया है। 20 बेड का वार्ड बनाया गया है। इसके साथ ही दवा आदि की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। आने वाले मरीजों का बेहतर इलाज किया जाएगा।
-प्रो. राजेश मोहन, प्राचार्य, माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल काॅलेज
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कोल्ड रूम और ओआरएस काॅर्नर बना दिया गया है। सभी को निर्देश दिए गए हैं। अधीक्षकों को दवा आदि की पूरी व्यवस्था के लिए कहा गया है। हर जगह व्यवस्था है। आने वाले पीड़ित मरीजों का इलाज किया जाएगा।
-डॉ. आरके चौरसिया, सीएमओ