सिद्धार्थनगर/बर्डपुर। पंचायती राज संस्थाओं को दी जाने वाली धनराशि से होने वाले कार्यों में व्यापक अनियमितता और धन की बंदरबांट की शिकायतों को शासन ने गंभीरता से लिया है। इसके चलते जिले की दस बड़ी ग्राम पंचायतों में हुए विकास कार्य जांच के दायरे में आ गए हैं। इसके लिए स्वतंत्र टीएसी (टेक्निकल ऑडिट कमेटी) का गठन किया गया है। यह समिति संबंधित ग्राम पंचायतों में जाकर वहां पिछले तीन वर्षों में राज्य वित्त, चौदहवें वित्त सहित अन्य मदों से अवमुक्त धनराशि से हुए कार्यों की गुणवत्ता जांचेगी।
कमेटी 16 बिंदुओं पर जांच के बाद अपनी रिपोर्ट देगी। जांच के दायरे में आई ग्राम पंचायतों में पांच बर्डपुर ब्लॉक की हैं, जबकि दो ग्राम पंचायतें नौगढ़ विकास खंड की हैं। डुमरियागंज व इटवा से भी एक-एक ग्राम पंचायतों को चिह्नित किया गया है।
गांवों में होने वाले विकास कार्यों में अनियमितता और धन की बंदरबांट की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए शासन ने टीएसी जांच के निर्देश दिए हैं। इसके जरिये जिम्मेदारों की जवाबदेही तय करने के साथ ही कार्यों में गुणवत्ता सुनिश्चित की जाएगी। शुरुआती दौर में जांच के लिए जिले की उन ग्राम पंचायतों को चुना गया है जो आबादी के लिहाज से सबसे बड़ी हैं और वहां धनराशि भी ज्यादा अवमुक्त की गई है।
जिले की दस ग्राम पंचायतें इस श्रेणी में शामिल हैं। इनमें बर्डपुर ब्लॉक की बर्डपुर नंबर नौ, बर्डपुर नंबर 13, बर्डपुर नंबर 11, बर्डपुर नंबर 12, बर्डपुर नंबर 1, सदर ब्लॉक क्षेत्र की बर्डपुर नंबर 14, थरौली, इटवा ब्लॉक की इटवा और डुमरियागंज ब्लॉक की बढ़नीचाफा ग्राम पंचायत शामिल है।
मंडलायुक्त की अध्यक्षता में गठित यह टीम कुल 16 बिंदुओं पर दस्तावेजों की जांच के साथ ही भौतिक सत्यापन भी करेगी। शासन का यह फरमान आने के बाद जिले की सभी संबंधित ग्राम पंचायतों के सचिव और ब्लॉक के एडीओ पंचायत फाइलें दुरुस्त करने में जुटे हैं।