भनवापुर और इटवा में टिड्डियों ने बोला धावा
थाली बजाकर और पटाखा फोड़कर भगाने में जुटे किसान
अमर उजाला ब्यूरो
इटवा/भनवापुर। इटवा और भनवापुर क्षेत्र में टिड्डियों के दल ने सोमवार शाम को फसलों पर धावा बोल दिया। मंगलवार सुबह भी टिड्डियों का कहर क्षेत्र में जारी रहा। परेशान किसान मंगलवार को भी थाली बजाकर और पटाखा फोड़कर अपने खेतों से टिड्डियों को भगाने में जुटे रहे।
बलरामपुर से सोमवार शाम जिले के भनवापुर ब्लॉक क्षेत्र में टिड्डियों का एक बड़ा दल प्रवेश कर गया। आसमान पर छाए टिड्डियों के दल ने इटवा और भनवापुर के बड़े भूूूूभाग पर खेतों पर हमला बोल दिया। रोपे गए धान पर हमले से परेशान किसान ढोल थाली पीट, पटाखे फोड़कर और धुआं करके टिड्डियों के हमले से अपनी फसल की रक्षा करते रहे। अंधेरा होने के बाद टिड्डियां बैठ गईं। कुछ किसानों ने रात में ही कीटनाशक दवाओं का छिड़काव किया लेकिन यह उपाय कम ही लोगों द्वारा करने से बहुत असर नहीं दिखा। मंगलवार सुबह टिड्डियों का दल एक बार फिर सक्रिय हुआ और फसल पर टूट पड़ा। किसान थाली आदि बर्तन बजाकर, पटाखा फोड़कर और अन्य तरीकों से तेज आवाज कर टिड्डियों को भगाने में जुटे रहे। जानकारों के अनुसार यदि टिड्डियों ने अपना रास्ता नहीं बदला तो बुधवार को यह दल बढ़नी ब्लॉक के गांवों में प्रवेश कर जाएगा।
सारी वनस्पति चट कर जाती हैं टिड्डियां
कृषि विज्ञान केंद्र सोहना के कृषि वैज्ञानिक डॉ. एलसी वर्मा बताते हैं कि टिड्डियां फूल, फल, पत्ते, बीज, पेड़ की छाल और अंकुर आदि खाती हैं। हर एक टिड्डी अपने वजन के बराबर खाना खाती हैं। डॉ. प्रदीप कुमार ने बताया कि टिड्डियों को उनके चमकीले पीले रंग और पिछले लंबे पैरों से पहचाना जा सकता है। टिड्डी जब अकेली होती हैं तो उतनी खतरनाक नहीं होती है, लेकिन झुंड में रहने पर इनका रवैया बेहद आक्रामक होता है। उन्होंने बताया कि इन्हें भगाने के लिए थालियां, ढोल, नगाड़े, लाउडस्पीकर या दूसरी चीजों के माध्यम से शोर मचाएं।