सीमा पार की बेटियों को रक्षाबंधन में मायके आने की चिंता
सीमा सील होने से सीमा पार मायके जाकर रक्षाबंधन-नागपंचमी नहीं मना पाने की पीड़ा
दोनों देशों की बहू-बेटियों ने कहा हम जहां हैं खुश हैं हमारा मायका न छुड़ाए सरकार
विजय श्रीवास्तव
बढ़नी। शादी के बाद नेेपाल में जाकर बसी इस देश की बेटियों को नागपंचमी और रक्षाबंधन में मायके नहीं पहुंच पाने की चिंता सता रही है। कोरोना संकट में सीमा सील किए जाने से परेशान सीमा क्षेत्र में रहने वाली बेटियों और उनके माता-पिता ने पुरानी परंपराओं को बरकरार रखे जाने की अपील नेपाल और भारत सरकार से की है।
वरिष्ठ नागरिक सीताराम कहते हैं कि राम की जनकपुर (नेपाल) में ससुराल है। इससे पहले से नेपाल और भारत के बीच रोटी बेटी का संबंध चला आ रहा है। प्राचीन काल से मुगलों और फिर ब्रिटिश काल में भी इन दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संबंध बरकरार रहे। संबंध इतने प्रगाढ़ रहे कि दोनों देशों में सीमा पर रहने वालों में वैवाहिक संबंध होते आए हैं। वरिष्ठ नागरिक त्रियुगीनाथ अग्रहरि चिंता जताते हैं कि कोरोना लॉकडाउन और अब नक्शे का विवाद, नेपाल सरकार का रवैया भारत के प्रति बदला है जो कि क्षेत्र के सामाजिक-सांस्कृतिक संबंधों के लिए सोचनीय है। सीमा सील होने पर सीमा पार ब्याही गईं दोनों ओर की बेटियां इस बार मायके आकर भाई को राखी बांध पाएंगी या नहीं इस पर अनिश्चय की स्थिति है। मधवानगर निवासी अर्जुन यादव की पत्नी मीना देवी का मायका नेपाल के कोहडवरिया तौलिहवा में है। कहती हैं कि विवाह के बाद से हर साल रक्षाबंधन, नागपंचमी मनाने मायके जाती थीं। चिंता जताती हैं कि इस बार शायद नागपंचमी पर सखियों के साथ झूला नहीं झूल पाएंगी। यदि ऐसा हुआ तो उन्हें इसका मलाल ताउम्र रहेगा। कहती हैं कि सरकार रक्षाबंधन के दिन जिस तरह महिलाओं के लिए बस यात्रा मुफ्त करती हैं उसी तरह नेपाल सरकार से बात कर रक्षाबंधन के दिन सीमा खुलवाए ताकि बहनें अपने परिवार से मिलकर भाई को राखी बांध सकें। वार्ड नंबर तीन लोहियानगर बढ़नी निवासी प्रदीप की पत्नी मनु का मायका फरसट्टीकर रूपेनदेई नेपाल में है। कहती हैं कि शादी के बाद बेटियां हर वर्ष रक्षाबंधन का इंतजार करती हैं कि परिवार और भाइयों से मिलन होगा, सरकारों की खींचतान में बेटियों का यह इंतजार लंबा न हो जाए, सरकारों को इस पर विचार करना चाहिए। बस स्टॉप निवासी शिव कुमार विश्वकर्मा की पत्नी सीमा स्थित कृष्णानगर नेपाल की रहने वाली हैं। कहती हैं कि वह नेपाल में पैदा जरूर हुईं लेकिन पढ़ाई से लेकर सहेलियां तक सीमा पार भारत के गांव घरुवार में हुुई, हमेशा बेरोकटोक यहां और पिता के घर आना-जाना रहा। भगवान से प्रार्थना करती हैं कि यह परंपरा इस बार भी जारी रहे। भाजपा कार्यसमिति के सदस्य, वरिष्ठ नेता सुनील अग्रहरि कहते हैं कि वह नेपाल के सांसद अभिषेक प्रताप शाह, विधायक वीरेंद्र कानोडिया से लेकर दोनों जिलों के आला प्रशासनिक अधिकारियों से संपर्क कर रक्षाबंधन, त्योहार पर बहू-बेटियों केे उनके मायके आने जाने की अनुमति दिलाने का प्रयास कर रहे हैं।