फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

लंबी दूरी के स्कूलों में जाने से हिचक रहे शिक्षक

Fri, 01 Jul 2016 10:55 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
विज्ञापन
सरकारी स्कूल - फोटो : amar ujala
विज्ञापन
सिद्धार्थनगर। इसे भत्ते की चाह कह लें या फिर सुविधाओं का आकर्षण। शिक्षा का अंधियारा मिटाने का संकल्प लेकर अध्यापन के पेशे में उतरे शिक्षक दूर-दराज के क्षेत्रों में जाने से परहेज कर रहे हैं। सबको नगरीय क्षेत्र ही भा रहा है। यह आकर्षण इस कदर है कि इसे पाने के लिए वह हर संभव प्रयास करने में पीछे नहीं है। पहुंचदार शिक्षकों की जी-तोड़ कोशिशों का ही असर है कि नगरीय क्षेत्र के स्कूलों में छात्र संख्या के अनुपात से अतिरिक्त शिक्षक जमे हुए हैं। वहीं दूर-दराज के स्कूल एक अदद शिक्षक के लिए तरस रहे हैं। 
विज्ञापन

जिले की सीमा से गुजरे दो-दो नेशनल हाईवे व अन्य प्रमुख राजमार्गों पर स्थित स्कूलों की मुख्य मार्ग से इतर स्थित स्कूलों से तुलना करें तो अंतर जमीन-आसमान का है। आरटीई के नियमों के तहत प्राथमिक में 35 और पूर्व माध्यमिक में 30 बच्चों पर एक शिक्षक की तैनाती होनी चाहिए।
सुविधाजनक क्षेत्रों में यह मानक दरकिनार कर दिए गए हैं। 70-80 बच्चों वाले स्कूलों में 5-6 शिक्षकों की तैनाती की गई है। नौगढ़ नगर पालिका क्षेत्र के 6 प्राथमिक और 3 पूर्व माध्यमिक विद्यालयों का ही उदाहरण लें तो यहां के प्रत्येक स्कूल में 5 से 6 शिक्षक तैनात हैं, जबकि बच्चों की उपस्थिति कहीं भी सैकड़ा पार नहीं कर पाई है।
विज्ञापन

नगर से सटे थरौली, जगदीशपुर, पुरानी नौगढ़, धेनसा, दतरंगवा, पोखरभिटवा, हुसैनगंज, मुड़िला, परसा महापात्र के स्कूलों का भी ऐसा ही हाल है। बांसी नगर पालिका क्षेत्र के स्कूल भी शिक्षकों की तैनाती में इस असमानता के शिकार हैं। विभाग इसे कागजों में दशाई जाने वाली बच्चों के नामांकन को आधार बता रहा है, मगर नामांकन के बावजूद बंद चल रहे स्कूलों का उदाहरण देने पर जिम्मेदार चुप्पी साध ले रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें