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कैसे होगा धान, संकट में किसान

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बारिश नहीं होने से मंडराने लगा है सूखे का खतरा
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जिले में डेढ़ लाख हेक्टेयर रकबे पर होती है धान की खेती
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। मौसम की बेरुखी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। कैसे धान होगी, किसान इस समस्या से परेशान हो गए हैं। पहले अतिवर्षा और बाढ़ ने फसल को बर्बाद कर दिया और अब सूखे की स्थिति किसानों के अरमानों पर पानी फेर रहा है। किसानों का कहना है कि अगर जल्द बारिश नहीं हुई तो ऊंचे हिस्से वाले खेतों का धान सूखने लगेगा।
प्रकृति के भरोसे जीने वाले किसान हर बार किसी न किसी आपाद की मार खा जाते हैं। तराई क्षेत्र में गिने जाने वाले इस जनपद के किसान मुख्य रूप से धान और गेहूं की फसल लगाते हैं। इस वर्ष धान की रोपाई शुरू होने के बाद अतिवर्षा से निचले हिस्से वाले खेत डूब गए और अधिकांश फसल नष्ट हो गई। वहीं बाढ़ग्रस्त इलाके का धान बाढ़ के पानी में डूबकर खत्म हो गया। अब जो फसल थी, उसमें किसानों ने जी-तोड़ मेहनत करके उसे बचाया, लेकिन अब वह भी सूखे की भेंट चढ़ती हुई नजर आ रही है। किसान सूर्यप्रकाश त्रिपाठी, रुद्रनरायन, विजयनाथ, सोमनाथ, चिन्नू यादव और रामसेवक आदि किसानों का कहना है कि बारिश के बाद अतिवर्षा से जो फसल बची वह अच्छी थी। उम्मीद था कि लागत नहीं डूबेगी, लेकिन पिछले कई दिनों से बारिश नहीं होने से खेतों की नमी खत्म हो गई है। अगर जल्द बारिश नहीं हुई तो ऊंचे हिस्से के खेत सूखने लगेंगे। इस बाबत जिला कृषि अधिकारी चंद्रप्रकाश सिंह ने बताया कि अभी सूखे जैसे हालात फिलहाल नहीं हैं। बारिश नहीं होने से ऊंचे हिस्से के खेतों की नमी घटी है। अगर जल्द बारिश नहीं होती है तो किसान पानी भरना शुरू कर दें। नहीं तो उत्पादन पर असर पड़ेगा।
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57 गांव बाढ़ प्रभावित
प्रशासन की ओर से जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक जिले में 57 गांव ऐसे चिन्ह्म्ति किए गए थे जो बाढ़ से प्रभावित थे। नदी के तट के पास बसे इन गांवों में बाढ़ के पानी से धान की फसल पर पहले ही बुरा असर पड़ा है। यहां के अधिकांश पहले ही फसल गवां चुके हैं। अब सूखा से जिनकी फसल है वह भी बर्बाद हो जाएगी।
बड़े रकबे पर हुई है धान की खेती
कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले में एक लाख 70 हजार हेक्टेयर रकबे पर धान की खेती की गई है।
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